🕉️🚩 सनातन संस्कृति के पतन का कारण 🚩⚜️
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है सनातन धर्म के अनुयायियों !
क्या कभी आप ने विचार किया है कि सनातन धर्म के अनुयायियों के निरंतर पतन का कारण क्या रहा ? हम सनातन संस्कृति के अनुयायियों की ऐसी कौन सी गलती रही कि हमारी सभ्यता एवं संस्कृति हजारों वर्षों तक विदेशी संस्कृति की गुलाम रही? विश्व का महानतम धर्म एवं शक्तिशाली संस्कृति किस प्रकार से शक्ति हीन होकर पतन के घर्त में गिरती चली गई? हमने कभी इस विषय पर गहराई से सोचना ही नहीं चाहा और यदि सोचा भी हो तो कभी कुछ दृढ़ता से करना ही नहीं चाहा! हम अपनी किसी शपथ पर कायम नहीं रह सकते क्योंकि हम जातिवादी हैं और हमारी जातियों के अपने-अपने हित एवं एजेंडे हैं। हम जाति के नाम पर धर्म एवं राष्ट्र को हाशय पर धकेल कर उसके विनाश का कारण बन सकते हैं ! बस हमारे जातिगत हितों का संधान होना चाहिए। बाकि देश एवं धर्म के साथ कुछ भी हो हमें कोई समस्या नहीं है । हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। यदि हम ऐसी जातिवादी सोच को लेकर के जी रहे हैं तो निश्चित रूप से यह हमारे विनाश के लिए हमारे ही द्वारा खोदी गई गहरी खाई है ,जिसे पाटे बिना हमारा कल्याण कभी संभव नहीं हो सकता । जब तक यह जातिवाद जिंदा है, राष्ट्रवाद एवं धर्म वाद कभी भी फली भूत नहीं हो सकता। यदि हमें सनातन धर्म एवं सनातन संस्कृति की रक्षा करनी है तो सबसे पहले इस जातिवादी मानसिकता को खत्म करने के लिए अभियान चलाना होगा । तभी जाकर के हिंदुओं में एकता एवं अखंडता की स्थापना हो सकती है । वैदिक वर्ण व्यवस्था का सिद्धांत ज्योतिष गणना एवं जन्मपत्रिका के अनुसार चलता था, जिसे हमने जातिवादी व्यवस्था में बदल करके सनातन के साथ घोर अन्याय किया है और उसी का दंड सनातन धर्म भुगत रहा है। इसी जातिवाद की वजह से भारतवर्ष ने हजारों वर्षों की गुलामी भोगी है। भारतवर्ष की समस्त समस्याओं की जड़ यह जातिवाद है इस जातिवाद से बाहर निकलने का एवं निकालने का भरसक प्रयास करना ही होगा, इसे आंदोलन बनाना ही होगा। राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा के लिए हम सबको मिल करके यह बीड़ा उठाना ही होगा। एक समर्पण समस्त लक्ष्य को साध सकता है। जातिवादी मानसिकता से मुक्ति यह राष्ट्र मुक्ति एवं उन्नति का सर्वोपरि सिद्धांत हो सकता है।
🕉️🚩 आओ हम अपने नाम के पीछे से जाति को हटाना प्रारंभ करें।
मैं आप सबसे सनातनी हिंदू बनने का आह्वान करता हूँ।
अपने नाम के पीछे धर्म की रक्षा के लिए हिंदू, सनातनी , आर्य या मानव लगाऐं और सनातनी होने का परिचय दें। यदि आप सनातनी है तो सनातनी दिखें।
🚩👏सनातन संस्कृति पूर्णतया मानवीय मूल्यों पर टिकी है । धर्म से आप एक कदम आगे बढ़कर मानवीय मूल्यों के आधार पर मानव शब्द को भी अपने नाम के पीछे स्थान दे सकते हैं। यह अपने आप में और अधिक विराट मानसिकता को दिखाता है। यह कट्टरता नहीं सौम्यता दिखाता है। अहंकार नहीं नम्रता दिखाता है। वैसे भी प्रत्येक मनुष्य की जाती मानव जाति ही है । विज्ञान की भाषा में जातियां मनुष्य जाति, पशु जाति ,पक्षी जाति ही होती है। यदि जाति वाचक शब्द लगाना भी है तो अपने नाम के पीछे सिर्फ "मानव "लगाना चाहिए और यदि धर्म के प्रति गर्व का भाव है और धर्म लगाना है तो "हिंदू या सनातनी"ही सर्वोपरि है। यदि आपको हमारी संस्कृति की महानता पर गर्व है तो फिर "आर्य" शब्द अपने आप में आपके लिए सर्वश्रेष्ठ है। अपने नाम के पीछे इन्हीं शब्दों में से किसी एक उचित शब्द को स्थान दीजिए । मानवीय मूल्यों पर आधारित सनातन संस्कृति के वाहक के लिए इन चार शब्दों के अलावा अन्य कोई शब्द शेष नहीं रह जाता जो कि समाज को एकता एवं अखंडता के सूत्र में नहीं बांधता हो। भरसक प्रयास करें यह अपने आप में साधना होगी-- सामने वाली की जाती जब तक हमें पता ना लग जाए, हमारा पेट दर्द ना करें! यदि हम ऐसा कर सके और एक दूसरे से वर्तमान में प्रचलित जातियों के आधार पर भेदभाव करना भूल गए तो निश्चित रूप से सनातन धर्म का वह दिन स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा और भारतवर्ष के स्वर्णिम युग की शुरुआत उसी दिन से होगी। जातिगत अहंकार मनुष्य को मानवीय मूल्यों से दूर कर देता है । यह व्यवस्था किसी को अहंकारी तो किसी को आत्म सम्मान से रहित कर देती है । अध्यात्म के पथ पर, धर्म के पथ पर , ज्ञान के पथ पर ,दोनों ही स्थितियां बड़ी खतरनाक हैं। ये अपने आप में समाज को तोड़ने की भयंकर भूल रही है। यहां दबाने वाला अहंकार से भर जाएगा और दबने वाला दयनीयता से भर जाएगा। परमात्म ज्ञान के पथ पर दोनों स्थितियां सत्य से दूर करने वाली हैं। दीनता तो परमात्मा को प्राप्त कर भी सकती है किंतु अहंकार कभी परमात्मा तक नहीं पहुंच सकता । अहंकार का सिर्फ और सिर्फ पतन होता है। समय आने पर नियति अहंकारी के अहंकार को तोड़ कर रख देती है। यही सनातन धर्म के साथ हुआ है। हमने ज्ञान , विज्ञान, दया ,करुणा नम्रता, शालीनता, परोपकार त्याग ,तितिक्षा, बलिदान एवं कण-कण में ब्रह्म भाव को ठुकरा कर भेदभाव एवं अहंकार को स्थान दिया। अपने आप को ऊंचा और दूसरे को नीचा दिखाने का संपूर्ण ताना-बाना बुना । हम अपने विनाश के स्वयं बुनकर हैं ।जिस ताने-बाने को हमने गुना एवं बुना उसमें हम स्वयं उलझ करके रह गये और हम अपने ही पाखंड की वजह से विनाश को प्राप्त हो रहे हैं। हम इस अन्याय पूर्ण व्यवस्था का पर्याप्त दंड भोग चुके हैं और यदि समय रहते इससे बाहर नहीं आए तो संपूर्ण विनाश के लिए तैयार रहना होगा। हमारे ऋषियों ने प्रकृति के अनुसार प्राप्त होने वाले गुणों के आधार पर हमें वर्ण व्यवस्था का विज्ञान दिया था जो की जन्म के साथ ही निश्चित हो जाता है। एक पिता की चार संताने अलग-अलग वर्ण की हो सकती है। इस विज्ञान को आप अपनी जन्मपत्रिका से जांच सकते हैं ।आप किसी भी जाति के हों किंतु आपका वर्ण आपकी जन्म पत्रिका बताएगी। जो जन्मपत्री बताएगी वही नैसर्गिक गुण आपके अंदर मौजूद हैं। आपको उन्हें परिवर्तित करने के लिए एक विज्ञान युक्त साधना पद्धति से गुजरना होगा । इसी को अध्यात्म विज्ञान एवं साधना पथ कहते हैं । जिससे गुजर कर आप अपने वर्ण में रूपांतरण कर सकते हैं। यह भेदभाव पूर्ण प्रक्रिया नहीं बल्कि एक विज्ञान सम्मत प्रक्रिया है किंतु जातिवाद पूर्णतया भेदभाव युक्त पद्दती है। यह अपने आप में समाज के साथ बहुत बड़ा धोखा एवं कलंक है और जब तक यह जातिवाद अस्तित्व में है। सनातन धर्म एवं भारतवर्ष का कभी कल्याण नहीं हो सकता , इसलिए प्रत्येक राष्ट्रवादी एवं धर्म रक्षक का प्रथम कर्तव्य इस जातिवाद को जड़ मूल से उखाड़ कर फेंकने का होना चाहिए और इसकी शुरुआत अपने नाम के पीछे" हिंदू, सनातनी, आर्य या मानव "लगा करके करनी चाहिए। हमने न जाने कौन सी मानसिकता से विज्ञान सम्मत वर्ण व्यवस्था को पूर्णतया पाखंडवाद पर आधारित जातिवाद में बदला और यह जातिवाद सनातन के अस्तित्व के लिए उसी दिन से खतरा बन गया विनाश का कारण बन गया। यह धीरे-धीरे इसे कमजोर करता चला गया और हम कमजोर होते चले गए । आओ! अपनी कमजोरी से बाहर निकलें और फिर से सनातन को अपनी शक्ति की ओर लेकर आगे बढ़ें। हम जातिवाद से बाहर निकलें, अहंकार से बाहर निकलें हिनभाव से बाहर निकलें क्योंकि बुद्धि की सम अवस्था ही परमात्म प्राप्ति में सहायक हैं। अहंकार एवं हिनता दोनों सत्य ज्ञान के पथ पर बाधक हैं।
-- सनातनी योगाचार्य रामेश्वर हिंदू मानव (मेरी संपूर्ण पहचान )
⚜️🚩सत्यमेव जयते🚩⚜️
⚜️🚩 जय गुरुदेव 🚩⚜️
⚜️🚩जय मां आदिशक्ति🚩⚜️
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