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Friday, May 31, 2024

मुसलमान की तपस्या

🕉️🚩 🔥मुसलमान की तपस्या 🔥🚩🕉️
🔥क्या कभी आप ने गंभीरता से विचार किया है कि एक छोटे से कबीले एवं बंजर भूमि से निकला इस्लाम का सिद्धांत आधे विश्व पर किस प्रकार से काबिज हो गया? व्यक्ति बड़े-बड़े तर्क करते हैं ,वाद विवाद करते हैं किंतु जो करना चाहिए वह करने से बचे रहते हैं। क्या कभी किसी मीडिया हाउस ने , किसी अनुसंधान कर्ता ने इस विषय पर रिसर्च किया कि आखिरकार इस्लाम इतनी तेजी से संपूर्ण विश्व में किस प्रकार से फैल गया और आज भी फैल रहा है? जबकि इस्लाम किसी विज्ञान युक्त सिद्धांत पर आधारित  विचार पद्धति नहीं है। इसे धर्म कहना भी शायद न्याय संगत नहीं होगा क्योंकि धर्म मानव मात्र ही नहीं प्राणी मात्र का हित संधान करना सीखाता है ,इस्लाम में प्राणी मात्र के हित का कोई सिद्धांत नहीं! यह सिर्फ अपने वर्चस्व के सिद्धांत पर चलने की विचार पद्धति है,जिसमें दया, करुणा, सामंजस्य के लिए कोई स्थान नहीं, यहां पर सिर्फ विलीनीकरण है। यहां पर  दया ,  परोपकार की भावना दिखाई देती है तो सिर्फ इस्लाम को मानने वालों के लिए बाकी सब के लिए इन शब्दों का कोई स्थान नहीं । बाकी के लिए सिर्फ और सिर्फ जेहाद, मृत्यु का तांडव, विनाश लीला। किंतु फिर भी इस्लाम इतनी तीव्रता से कैसे आधे विश्व पर काबिज हो गया? क्या कभी सोचा है? क्या कभी विचार करने का प्रयास किया है? नहीं ना! कर भी कैसे सकते हो क्योंकि शायद हमारे पास इतना समय एवं इतनी बुद्धि भी नहीं है? यदि होती तो कभी इस विषय पर गंभीरता से विचार करते और उन कारणों को ढूंढते जिससे इस्लाम इतनी तीव्र गति से विश्व के आधे भाग पर काबिज हो गया और उन कारणों को भी ढूंढते जिनकी वजह से संपूर्ण विश्व में काबिज सनातन धर्म के सिद्धांत धीरे-धीरे समाप्त होते होते एक छोटे से भाग में आकर सिमट गए।
🔥👏 गहराई से इस विषय पर चिंतन करें तो हम पाएंगे की समय काल परिस्थिति के अनुसार हमारी संस्कृति में बहुत कुछ ऐसा घुसा दिया गया, जिससे हमारी शक्ति निरंतर क्षीण  होती गई । हमारी एकता एवं अखंडता खंड-खंड होती चली गई , जबकि इस्लाम ने उन महत्वपूर्ण तथ्यों पर विशेष जोर दिया जो इस्लाम को एकता एवं अखंडता के सूत्र में पिरोये रखने के लिए आवश्यक थे। हमने जाति एवं गोत्र के नाम पर हमारे समाज को खंड-खंड किया। ऊंच- नीच, छुआछूत एवं भेदभाव युक्त प्रणाली को पनपने दिया। हमने इस प्रणाली के दुष्परिणाम  के संबंध में कभी गंभीरता से विचार करना ही नहीं चाहा। हमने पूर्ण विज्ञान पर आधारित वर्ण व्यवस्था को पूर्णतया पाखंड पर आधारित जाति व्यवस्था में बदला । वहीं इस्लाम ने धर्म के नाम पर  जाति वाद का अंत किया। जिनको मार मार के मुसलमान बनाया गया, बाद में वे ही इस्लाम के लिए मरने एवं मारने के लिए उतारू हो गए। आखिर कार ऐसा क्यों हो गया? भारतवर्ष में रहने वाले अधिकांश मुसलमान आज भी अपनी पुरानी वंशावली के अनुसार अपने आप को हिंदू ही मानते हैं किंतु फिर भी वे  सहजता से सनातन में लौटना नहीं चाहते बल्कि वे रात दिन इस्लाम के संपूर्ण विश्व में विस्तार के लिए कठोर तपस्या कर रहे हैं।"गजवा ए हिंद " का लक्ष्य लेकर एक- एक क्षण इस्लाम के लिए तपस्या कर रहे हैं। तुम कहोगे - मुसलमान तपस्या कहां कर रहा है? कैसे कर रहा है? हमने तो देखा ही नहीं! नहीं भाई नहीं आपको मुसलमान की तपस्या दिखाई नहीं देगी क्योंकि आप तो उस कुंभकरण के वंशज हैं जो एक दिन जगता था और 6 महीने सोता था। एक दिन जागने वाले को बाकी रात दिन जगने वाले कहां दिखाई देंगे ? उसे तो वे सब भी सोते हुए ही दिखाई देंगे! कहते हैं ना "जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि"।
यदि देखना चाहते हो एक मुसलमान की तपस्या तो देखो मेरी दृष्टि से तुम्हें एक-एक मुसलमान सच्चा तपस्वी नजर आएगा, इस्लाम का योद्धा नजर आएगा। 
🔥 दो बिघे जमीन नहीं, खाने को अन्न नहीं, फिर भी 15 बच्चे किसके लिए❓
🔥 तुम्हें अच्छा मकान, दुकान, गाड़ी , नौकरी एवं छोकरी चाहिए। यहां पर ना तो मकान है ना दुकान है ना गाड़ी है ना नौकरी है फिर भी 15 बच्चे पैदा करने के लिए छोकरी उपलब्ध है कैसे एवं किसके लिए? जिन देशों में इस्लामी साम्राज्य स्थापित हो गया है ,क्या वहां का मुसलमान भी 15 बच्चे पैदा कर रहा है? यदि नहीं तो भारत में किसलिए? 
और तुम्हारे पास इनमें से थोड़ा बहुत कुछ कम हुआ तो तुम्हारे को छोकरी ही नहीं मिलेगी❓ वहां पर घर में कुछ नहीं है फिर भी 15 बच्चे पैदा करने के लिए सब कुछ आखिर कैसे और किस लिए? 
🔥 तुम्हें व्हाइट कॉलर जॉब चाहिए उन्हें पंचर की दुकान में संतुष्टि है ,आखिर किस लिए? 
🔥 तुम्हारे पास सब कुछ है किंतु तुम्हारे घर में बच्चे मुश्किल से दो। एक को तो पराये घर जाना ही है एक तुम्हारे पास सेवा के लिए पर्याप्त। बहुत समझदार हैं अपने आप के लिए। यदि दो में से किसी एक को भी कुछ होने की स्थिति आई तो सांस गले में अटक गई और यदि कुछ हो गया तो जीते जी मर गए गम में। 
🔥 मुसलमान अपने बच्चों को धर्म की शिक्षा देने के लिए निशुल्क मदरसे चलाते हैं और उसमें क्या-क्या सिखाते हैं यह किसी से छिपा हुआ नहीं है, आखिरकार किसके लिए ❓ तुम धर्म की शिक्षा देने के लिए क्या चलाते हो? मंदिर या दुकान? कथा या भीड़  जुटाने का प्रपंच। 
🔥 मुसलमान अपनी कोम को एकता एवं अखंडता के सूत्र में बांधने के लिए प्रत्येक शुक्रवार एक स्थान पर नमाज के नाम पर एकत्रित होता है, आखिरकार किसके लिए❓
🔥 मुसलमान गरीबी, अभाव एवं फटे हाल जीवन जी रहा है फिर भी वह, वह कर रहा है जिस पर प्रश्न वाचक चिन्ह लगता है लेकिन वह प्रश्न वाचक चिन्ह नहीं लगाता ? 15 बच्चे पैदा  करने पर आखिरकार किस लिए❓ तुम्हें
सरकार से बहुत शिकायत है-- खाते में 15 लाख क्यों क्यों नहीं आए❓ महंगाई अधिक क्यों  है❓ पेट्रोल क्यों महंगा है ❓सरकारी नौकरी क्यों नहीं मिल रही और उसकी वजह से छोकरी भी नहीं मिल रही❓ इन सबके लिए सरकार जिम्मेदार है हम मोदी को वोट क्यों दे?❓
लेकिन एक मुसलमान एकजुट होकर के कांग्रेस को वोट करता है इसलिए कि वह "गजवा ए हिंद के सिद्धांत को सपोर्ट करती है। 
इससे आगे भी प्रत्येक मुसलमान बहुत कुछ कर रहा है जिसका शायद मुझे इल्म नहीं, तुम्हें पता नहीं ,आखिर किस लिए❓ कितना कठोर तपस्वी है एक मुसलमान मुझे प्रत्येक मुसलमान के साथ सहानुभूति है गूंउसकी तपस्या को देखते हुए। मैं मुसलमान से जलता नहीं मैं मुसलमान से सीखता हूं, बहुत कुछ ,जीवन पथ पर। अपने धर्म के प्रति दृढ़ता और कुछ भी कर गुजरने का जज्बा। यही मुसलमान की वह नीति है जिसने उसे आधे विश्व पर काबिज कर दिया है।  यदि समय रहते इसे नहीं पहचाना तो बहुत महंगा पड़ेगा क्योंकि मुसलमान एक तपस्वी है और वह लगातार तपस्या कर रहा है और तुम सो रहे हो अपने विनाश की तरफ आगे बढ़ रहे हो। अपने विनाश को आमंत्रित कर रहे हो तुम लड़ भी नहीं सकते और लड़ने की तुम्हारी तैयारी भी नहीं है क्योंकि तुम्हारे घर में दो बच्चे हैं ।यदि चला गया एक भी तो तुम वैसे ही मर जाओगे। बस तुम्हारे पास एक ही ऑप्शन है "मोदी एवं योगी "।यही तुम्हें बचा सकते हैं बाकी तुम्हारा तो रामजी ही जाने! यदि तुम इन्हें वोट भी ना दे सके तो तुम्हारा सर्वनाश तो निश्चित दिखाई दे रहा है क्योंकि फिर तुम्हारे लिए लड़ने वाला कोई नहीं बचेगा, कोई नहीं। 
क्योंकि मुसलमान अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए तपस्या कर रहा है और जिस दिन उसे उसका लक्ष्य प्राप्त करने की सहज स्थिति दिखाई देगी। उस दिन उसके द्वारा की जा रही घोर तपस्या का महा रोद्र रूप तुम्हारे सामने आएगा। जो की 1000 साल से कई बार तुम्हारे सामने आ चुका है ,किंतु तुम्हें अब तक समझ नहीं आया क्योंकि तुम कुंभकरण के वंशज हो। 6 महीने सोते हो एक दिन जागते हो। रात दिन जागने वाले तपस्वियों की तपस्या तुम्हें दिखाई नहीं देगी ! निश्चित रूप से गधा भी तुम्हारी नहीं ,हमारी  गधाई पर हंसता होगा । मन ही मन कहता होगा मुझसे अधिक बेवकूफ तो साले ये हिंदू हैं । 
👏 yah sab padhakar Kisi Kumbhkaran ke Vanshaj ki bhavnayen Aahat ho jaaye To Ham bilkul Bhi samaprathi Nahin Hai क्योंकि हम भी तुम्हारे ही वंश के वंशज है और कहते हैं ना अपने तो अपने होते हैं इसलिए हमारी गुस्ताखी को माफ करें । 
और हो सके तो आंखों के आगे आए हुए नींद के पर्दे को साफ करें। 
               -- कुंभकरण के वंश का एक गधा हिंदू
   🚩सत्यमेव जयते🚩

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