🕉🌞गोरख वाणी और गोरख योग 🌞🕉
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🌞👉 काजी मुल्लाओं ने कुरान पढ़ा ,ब्राह्मणों ने वेद -पुराण , कापडी (गंगोत्री से कावड़ में गंगाजल लाने वाले )और सन्यासियों को तीर्थों ने भ्रम में डाल रखा है लेकिन इनमें से किसी ने निर्वाण पद का भेद नहीं पाया ।
🌞👉 देवालय की यात्रा शून्य यात्रा है। तीर्थ की यात्रा तो पानी की ही यात्रा ठहरी जिसमें कोई सार्थकता नहीं। सफल यात्रा अतीत यात्रा है ,साधु संतों के दर्शनों के लिए की जाने वाली यात्रा है ,जो अमृतवाणी बोलते हैं । उनके सत्संग और उपदेश श्रवण से जो लाभ होता है वह किसी यात्रा से संभव नहीं ।
🌞👉 अधर यानी शून्य ब्रह्मरंध्र में हमने ब्रह्म तत्व का विचार किया। अधर में तो वही है, इस धरा में भी वही है। मूलाधार से लेकर ब्रह्मरंध्र तक सर्वत्र उसकी स्थिति है। कहीं वह स्थूल रूप से है, कहीं सूक्ष्म रूप से। जब धर अधर का परिचय हो जाता है ,तब मूलस्थ कुंडलिनी शक्ति का सहस्रारस्थ शिव से परिचय हो जाता है ,तब साधक के लिए अपने अनुभव ज्ञान से बाहर कुछ नहीं रह जाता।
🌞👉 योगी वह जो मन की रक्षा करें और परम शून्य अर्थात ब्रह्मरंध्र में देश के बिना ब्रह्मानुभूतिमय बड़े राज्य का उपभोग करे।
🌞👉 सन्यासी वह है जो अपने सर्वस्व का न्यास (त्याग )कर देता है। केवल शून्य मंडल में मिलने वाली ब्रह्मानुभूति की आशा के लिए जीता है । अनाहत को सुनकर मन को उन्मनावस्था में लीन किए रहता है ।वह सन्यासी स्वानुभव से अगम परब्रह्म का कथन करता है ।
🌞👉 हम भवसागर से पार उतर गए किंतु मूड संसारी लोग उसे पार नहीं कर सके ,इसी किनारे रह गए ।परंतु जो स्थिरता के न होने के कारण अभी चंचल झूठा योगी है वह मझधार मे ही डूब जाता है उसे न वह किनारा मिलता है न यह । उसका यह लोक भी नष्ट हो जाता है और उसे मोक्ष भी नहीं मिलता।
🌞 साधक के दो शब्द-- यहां पर महायोगी गुरु गोरखनाथ ने धर्म के नाम पर विभिन्न प्रकार की मिथ्यावादी क्रियाओं में उलझे हुए लोगों की वास्तविक स्थिति का परिचय करवाया है । देवालय शब्द" देव+ आलय "शब्द के मेल से बना है ,जिसका अर्थ होता है-" देव शक्ति का निवास स्थान "। वैदिक दृष्टिकोण से देवालय हमारे शरीर को ही कहा गया है क्योंकि हमारे इसी शरीर में संपूर्ण देव शक्तियों का निवास हैं और उस देव उपस्थिति की अनुभूति हम ध्यान साधना अर्थात कुंडलिनी जागरण साधना के द्वारा स्पष्ट रूप से कर सकते हैं। किसी भवन विशेष को वैदिक दृष्टिकोण में देवालय नहीं माना गया है। इसी सत्य को विज्ञान भैरव तंत्र में भगवान शिव ने भी माता पार्वती को स्पष्ट रूप से समझाया है किंतु फिर भी मेरे स्वयं के दृष्टिकोण से देवालय एवं तीर्थ स्थान की यात्रा निरर्थक तो नहीं होती क्योंकि भारतवर्ष में कई ऐसे मंदिर एवं तीर्थ स्थान हैं, जहां पर उस परमपिता परमात्मा एवं जगत जननी मां की शक्ति का एहसास किया जा सकता है। यहां पर इस वाणी में मैंने अपना दृष्टिकोण प्रकट नहीं किया सिर्फ महायोगी गुरु गोरखनाथ के दृष्टिकोण को ही ध्यान में रखते हुए विचारों को अभिव्यक्ति दी है। निर्णय हमें स्वयं करना है किंतु महायोगी जी का मत तो यही है कि किसी मंदिर- मस्जिद या तीर्थ स्थान में जाने के स्थान पर अपने अंतस्थ में उतर कर के उस परमपिता परमात्मा को खोजना चाहिए। साथ ही योगी एवं सन्यासी की वास्तविक पहचान बताई है। महायोगी कह रहे हैं कि हम भव बंधनों से पार उतर गए किंतु जो झूठा योगी है अर्थात जो योग का आडंबर तो करता है। साधना के नाम पर सांसारिक जीवन की मर्यादाओं का उल्लंघन करते हुए उनसे विमुख हो जाता है। तरह-तरह के आडंबर करता रहता है किंतु जिसका मन एकाग्र नहीं है, शांत नहीं है, धारणा ,ध्यान के तत्व को जो नहीं समझता है जो इसका अभ्यास नहीं करता है ,वह सांसारिक जीवन से भी भटक जाता है एवं योग की युक्ति को नहीं अपनाने से मोक्ष रूपी परम लक्ष्य को भी प्राप्त नहीं कर पाता इसलिए वह मझधार में ही डूब जाता है ।उसे न तो सांसारिक सुख ही प्राप्त होते हैं न ही वह मोक्ष प्राप्त कर पाता है। आत्म जनों योग का अर्थ ही लीन हो जाना है ,मिल जाना है ,एकाग्र हो जाना है, खो जाना हैै।योग दिखावा या आडंबर वादी पद्धति नहीं। यह दिखाने का विषय नहीं बल्कि स्वयं देखने एवं जानने का विषय है। आपने योग मार्ग पर कितनी उन्नति प्राप्त की ? इस विषय में आपके बारे में आप से अधिक सत्य ज्ञान अन्य कोई नहीं रख सकता ! हाँ अनुभवी ,ज्ञानी, योगी गुरु आप की स्थिति को देखकर , समझ कर आप को मार्गदर्शन दे सकता है ,आगे बढ़ा सकता है किंतु राह पर चलने का कार्य सिर्फ और सिर्फ साधक को ही करना होगा इसलिए योग पथ पर सिर्फ और सिर्फ सच्चा साधक ही आगे बढ़ सकता है और वही मोक्ष रूपी परम लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।
👏 जातिवाद सनातन धर्म के लिए अभिशाप है, इससे बाहर आना ही होगा।
-- सनातनी हिंदू योगाचार्य रामेश्वरम मानव (मेरी संपूर्ण पहचान)
⚜️🚩सत्यमेव जयते 🚩⚜️
⚜️🚩 जय श्री राम 🚩⚜️
⚜️🚩 जय गुरुदेव 🚩⚜️
⚜️🚩 जय मां आदिशक्ति 🚩⚜️
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