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Tuesday, July 26, 2022

वेद एवं पुराण तुलनात्मक अध्ययन

🕉 वेद एवं पुराण तुलनात्मक अध्ययन 🕉

🌞👉 वेदों के अनुसार वह परमात्मा प्रकाश स्वरूप, सत चित आनंद, अजन्मा एवं निर्गुण निराकार है।
👉 पुराणों के अनुसार वह परमात्मा समय-समय पर अवतार लेता है।
🌞👉 वेदों के अनुसार उस परमात्मा को आश्रमोचित कर्तव्य कर्मों का आचरण , सम्यक ज्ञान के साथ योग साधना से ही प्राप्त किया जा सकता है।
👉 पुराणों के अनुसार उस परमात्मा को कलयुग में तो उठते-बैठते नाम जप करने मात्र से ही प्राप्त किया जा सकता है।
🌞👉 वेदों के अनुसार जब तक व्यक्ति मांस भक्षण एवं दुर्व्यसनों का त्याग करके यम -नियम का पालन नहीं करेगा,तब तक वह सत्य स्वरूप परमात्मा को नहीं जान सकता, उसका साक्षात्कार नहीं कर सकता, मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता।
👉 पुराणों के अनुसार व्यक्ति चाहे अपने आचरण एवं खानपान को नहीं सुधारें ,कितना ही  दुर्गुणी हो वह भगवान का नाम जप करने मात्र से पवित्र हो जाता है, मोक्ष प्राप्त करने का अधिकारी हो जाता है।
🌞👉 वेदों के अनुसार उस परब्रम्ह परमात्मा का साक्षात्कार करने के इच्छुक व्यक्ति को ,यदि साकार स्वरूप देखना है, तो यह समस्त चराचर जगत एवं ब्रह्मांड उसी का स्वरुप है किंतु यदि उस परमात्मा का संपूर्ण शक्ति सहित आत्म साक्षात्कार करना चाहते हो तो वह तुम्हारे हृदय रूपी गुहा में छिप कर बैठा है।योग साधना द्वारा तुम उसका साक्षात्कार सिर्फ और सिर्फ नाभि से 12 अंगुल ऊपर जो हृदय देश है, वहीं कर सकते हो। जब साधना करते हुए सहस्त्र चक्र  कमल दल को जागृत करोगे,  उस ब्रह्म के प्रकाश का साक्षात्कार करोगे तो वह सत्य स्वरुप परमात्मा तुम्हारे हृदय में प्रकाश स्वरूप में प्रकट हो जाएगा। इसके अलावा उसे अन्य किसी स्थान पर नहीं पाया जा सकता, खोजा नहीं जा सकता।
👉 पुराण कहते हैं कि उस परमात्मा का निवास उस पहाड़ पर है ,उस नदी में है ,उस तालाब में है ,उस कुंड में है ,उस मंदिर में है, उस मूर्त में है ।तुम वहां स्नान करो! ढोक लगाओ! पूजा अर्चना करो !परिक्रमा लगाओ!दर्शन करो! इससे तुम्हें असीम पुण्य प्राप्त होगा और मोक्ष मिलेगा अर्थात परमात्मा मिल जाएगा।
🌞👉 वेद कहते हैं कि विद्या दो प्रकार की है- अपरा एवम परा।
🌺 अपरा विद्या-  हवन  करना, कुंआ, बावड़ी ,अस्पताल आदि का निर्माण कराना, योग्य पात्र को दान देना और प्राणी मात्र की ऐन केन प्रकारेण सेवा करना । ये सभी परोपकार मयी  कर्म यज्ञ हैं।
🌺 परा विद्या- निष्काम भाव से आश्रम अनुकूल कर्तव्य कर्मों का आचरण करते हुए गायत्री महामंत्र का जप एवं योग साधना द्वारा उस सत्य स्वरूप परमात्मा को जानना।
🌺 अपरा विद्या का फल- जो साधक सकाम भाव से अपरा विद्या का साधन करते हैं, वे अपने उन अच्छे कर्मों के फल स्वरूप मृत्युपरांत स्वर्ग में जाएंगे एवं पुण्य समाप्त होने पर उन्हें पुनः मृत्यु लोक में जन्म ग्रहण करना पड़ेगा। यह क्रम जन्म जन्मांतरों तक चलता ही रहेगा, इन यज्ञ कर्मों से जीते जी सुख एवं मृत्यु उपरांत स्वर्ग मिलेगा किंतु ऐसे पुण्य कर्ताओं को परमात्मा का साक्षात्कार नहीं हो सकता, जब तक की वे कर्तव्य कर्मों का पालन करते हुए पराविद्या का पूर्ण निष्ठा एवं गहनता से अनुसंधान नहीं कर लेते।
🌺 परा विद्या का फल- इस विद्या के अंतर्गत जो यम नियम के साथ गायत्री महामंत्र व ओंकार के जप सहित योग साधना करता है एवं आश्रम उचित कर्तव्य कर्मों का पालन करता है,वह संपूर्ण ब्रह्मांड के नियंता त्रिगुणातीत परब्रह्म परमात्मा को प्राप्त कर लेता है, जान लेता है । वह जीवात्मा हमेशा हमेशा के लिए जन्म मृत्यु के बंधन से छूट जाता है।
👉 पुराण कहते हैं कि तुम उस नदी में स्नान कर लो, उस कुंड में स्नान कर लो,उस संगम में स्नान कर लो, उस मंदिर में दर्शन कर लो, उस तीर्थ में दान कर दो,तुम्हें मोक्ष निश्चित ही मिल जाएगा।जब भी मंदिर में जाओ खाली हाथ मत जाओ कुछ लेकर जाओ! परमात्मा को कुछ चढ़ाकर आओ! जहां भी कथा प्रसंग हो खाली हाथ मत जाओ! उस परमात्मा के निमित्त कुछ दान करो और  बस उठते-बैठते नाम जपते रहो! प्रभु का नाम और दान यही कलयुग में मुक्ति देने वाले हैं! कलयुग में अन्य युगों के समान योग साधना नहीं की जा सकती। कलयुग में तो सिर्फ प्रभु का नाम लेने एवं दान देने से ही मनुष्य को मोक्ष प्राप्त हो जाता है।कितना ही बड़ा पातकी हो एक बार प्रभु का नाम लेने से ही समस्त पापों से छूट जाता है। नाम जप करने में तुम्हारी भावना है या नहीं इसका भी कोई फर्क नहीं पड़ता, बिना भाव के भी यदि तुम नाम जपते हो तो तुम्हारी मुक्ति निश्चित है।
🌞👉 वेदों में सतयुग, त्रेता युग ,द्वापर व कलयुग के आधार पर कालखंड का कोई विभाजन नहीं किया गया है।संपूर्ण मानव मात्र एवं समय काल के लिए एक ही निश्चित सत्य निर्धारित किया गया है-- कर्तव्य कर्मों का  पालन करते हुए सुख एवं स्वर्ग के लिए अपरा विद्या एवं मोक्ष के लिए परा विद्या का अनुष्ठान।
👉 पुराणों में इन चार युगों में कालखंड को बांटा गया है एवं सतयुग का अलग धर्म ,अलग साधना पद्धति।द्वापर का अलग धर्म, अलग साधना पद्धति व कलयुग का अलग धर्म व अलग साधना पद्धति बतायी गई है। कलयुग में केवल नाम जप व दान को ही मोक्ष प्राप्त करने का माध्यम बताया है।
🌞👉 वैदिक युग में तपस्या का स्वरूप योग पद्धति ही है। इसके अलावा किसी भी तपस्वी ऋषि- मुनि ,राजा -महाराजा व जन सामान्य ने किसी अन्य साधना पद्धति का अनुसरण नहीं किया।प्राचीन समय की समस्त रिद्धियों -सिद्धियों का स्रोत योगविद्या ही थी।
👉 पुराणों में तपस्या का स्वरूप ऐसा बताया गया है, जिस तरीके से कभी किसी ने कोई तपस्या नहीं की और ना ही कोई कर सकता! यदि करेगा तो बहुत जल्दी ही बीमारियों का शिकार होकर मृत्यु के मुख में चला जाएगा!
🚩 वेदों के अनुसार मनुष्य की पूर्ण आयु 100 वर्ष ही  है जबकि पुराणों के अनुसार सतयुग ,त्रेता ,द्वापर में मनुष्य की आयु लाखों एवं हजारों वर्ष रही है।
🚩 सनातन संस्कृति में कालगणना का महानतम विज्ञान ज्योतिष विज्ञान है। इस ज्योतिष विज्ञान के अनुसार सतयुग, त्रेता , द्वापर एवं कलयुग का कोई भी उल्लेख कहीं पर भी नहीं है।
🚩 वेदों के अनुसार वर्ण व्यवस्था का आधार ज्योतिष विज्ञान था जबकि पुराणों के अनुसार यह जन्म आधारित है।
👏 हे मेरे  भाइयों, माताओं, बहनों ! आप सब विद्वान हैं और विज्ञान के युग में जी रहे हैं! सत्य क्या है और असत्य क्या है? यह आप स्वयं निश्चित कीजिए।
👉 जिस प्रकार इस्लाम सनातन धर्म के शास्वत नियमों के विपरीत हैं, उसी प्रकार यह पौराणिक पद्धति भी सनातन धर्म का चोला पहनकर वैदिक सनातन धर्म के विपरीत अज्ञानता पूर्ण अंधकार फैला रही है।
👉 जिन ग्रंथों का सहारा लेकर लोगों को अज्ञान के अंधकार की ओर धकेला गया है और धर्म को शुद्ध व्यवसाय का रूप दे दिया गया है जो वैदिक सनातन हिंदू धर्म नर को नारायण बनना सिखाता है ,इसी जीवन में संपूर्ण सत्य को प्राप्त करना सिखाता है।संपूर्ण शक्तियों का स्रोत हमारे अंदर ही है, उसे जगाना सिखाता है। उसके स्थान पर यह पौराणिक पाखंडवाद पूर्णत:  भटकाव वादी काल्पनिक दुनिया में भटकने के लिए छोड़ देता है। संपूर्ण विश्व सत्य सनातन धर्म की ओर अग्रसर हो  रहा है,संपूर्ण विश्व वैदिक ज्ञान की ओर बढ़ रहा है जो सिर्फ सनातन हिंदू धर्म का ज्ञान है। अपनी आस्थाओं को बनाए रखिए मंदिर तो मैं भी जाता हूंँ,  साकार स्वरूप पर मेरा भी विश्वास है क्योंकि निराकार में डूबने से पूर्व साकार ही आधार है। मंदिर तो जाना ही  चाहिए किंतु सत्य को सही दृष्टिकोण में समझ करके जाना चाहिए ।
        
           ⚜🚩⚜
आओ--
👉 सत्य की ओर लौटो!
👉 सनातन ज्ञान की ओर लोटो!
👉 ब्रह्म विद्या को जानो !
👉 कर्तव्य कर्मों का पालन हमेशा करते रहो!
👉दुर्व्यसन, मांँस भक्षण का  त्याग करो!
🌞👉 ओमकार व गायत्री महामंत्र का जप करो !

                                - योगाचार्य रामेश्वर मानव

      ⚜🚩सत्यमेव जयते 🚩⚜
👉 माँ आदि शक्ति कुंडलिनी योग झालरापाटन
    ⚜️🚩 जय गुरुदेव 🚩⚜️
   ⚜️🚩 जय मां आदिशक्ति 🚩⚜️

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