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Saturday, July 9, 2022

हिंदूओं तुम धन्य हो!

🕉️🚩 हिंदूओं तुम धन्य हो 🚩🕉️
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🕉️🚩👏 वाह रे मेरे हिंदुओं! धन्य है तुम्हारी एकता और अखंडता ! तुम्हारी एकता एवं अखंडता की इस ब्रह्मांड में कोई मिसाल नहीं है और धन्यवाद हैं उन अल्लाह के रसूल पर ईमान रखने वालों का  जिनके कारण तुम एक होने की बातें करने लगे हो, वरना स्वयं ब्रह्मा ,विष्णु ,महेश भी आ करके तुम्हें कभी एक नहीं कर सकते । इन इमान वालों के कारण तो वह कार्य होता हुआ दिखाई दे रहा है, जिसे ब्रह्मा, विष्णु, महेश मिलकर भी नहीं कर सकते क्योंकि  हिंदुओं तुम्हारे अंदर ऊंच-नीच ,भेदभाव एवं जातिगत स्वार्थ कूट-कूट कर भर चुका है। कहते हैं ना कि मरता क्या नहीं करता ,इसीलिए तुम एकता की बातें करने लगे हो !धन्य हो तुम  और धन्य है तुम्हारी पांडित्य पूर्ण बुद्धि ! लोग व्यर्थ ही गधों को मूर्ख कहते हैं! यदि इस संसार में  मूर्ख प्राणियों का सर्वे किया जाए तो गधे निश्चित ही तुम से हार जाएंगे और मूर्खता की दौड़ में गधों से तुम बाजी मार जाओगे! बेचारे गधे कितने भाग्यहीन हैं कि उन्हें संसार के सर्वश्रेष्ठ मूर्ख प्राणियों का ताज भी  नसीब नहीं होगा, यह ताज भी इन तथाकथित महा मूर्खों ने उनसे छीन लिया है। वैसे गधों से मूर्खता का ताज  छिपने के लिए इन्होंने हजारों वर्षों तक घोर मूर्खता का परिचय देते हुए  घोर कठोर परिश्रम किया है। देखो तो सही इन महा पंडितों की विद्वता एवं  महानता- अपनी लाखों मांँ बहनों की इज्जत अपनी आंखों के सामने लूटवादी, उन्हें बाजारों में नग्न करके बिकवा दिया न जाने कितने घर छोड़ दिए, न जाने क्या-क्या करके जो धन संपत्ति एकत्रित की थी, उसे छोड़कर भाग गए ,अपनी जान बचाने के खातिर। धन दौलत बर्बाद हो गये , मान सम्मान लुट गया ,मां बहनों की इज्जत लूट गई और न जाने कितनों को बेरहमी से इनकी आंखों के सामने कत्ल कर दिया गया किंतु फिर भी इन्हें  अब तक अक्ल नहीं आई! क्या ब्रह्मांड के सबसे अधिक मूर्ख प्राणी का ताज पाने के लिए इससे अधिक और किसी मूर्खता के प्रमाण की आवश्यकता है। तुम धन्य हो गधों के वंशजों निश्चित ही तुम   पिछले जन्मों में महामूर्ख गधों के वंशज  रहे होंगे। निश्चित ही गधों ने ही हिंदुओं के रूप में जन्म ले लिया है, जिन्हें  सिर्फ बोझा ढोने की आदत पडी हुई है। किंतु गधा चाहे कितना ही बड़ा मूर्ख क्यों ना हो , उसे भी मरने का डर तो लगता ही है और अब जब हमें मरने का डर सताने लगा है तो एक होने की  सोच रहे हैं ! किंतु क्या तुम सच में एक हो पाओगे? मुझे तो यह संभावना दिखाई नहीं देती ! शायद तुम्हारे एक होते-होते तुम्हारा अस्तित्व ही दम तोड़ दें किंतु तुम्हारी एकतावादी इस महान सोच को मैं प्रणाम करता हूंँ। तुम एक हो तो नहीं सकते ,कम से कम एक होने का नाटक तो कर ही सकते हो! हांँ कुछ नहीं करने से कुछ करना बेहतर है,इसीलिए वास्तविक अर्थ में एक न भी हो सको तो नाटक तो करते रहो!नाटक करने से भी कभी-कभी बहुत कुछ प्राप्त हो जाता है । फिल्म के नकली दृश्यों को देख कर के भी  हमारी आंखों में  आंसू आ ही जाते हैं, उस दृश्य की भाव धारा में बह कर के किंतु एक बात हमेंशा याद रखना, नाटक सिर्फ नाटक ही होता है। तुम्हारी नियत वास्तविक अर्थ में एक होने की नहीं है । यह एकता सिर्फ दिखावटी है, परिस्थिति वश है। यदि कुछ दिन इस स्थिति का एहसास होना बंद हो गया तो तुम फिर से लंबी गहरी नींद में सो जाओगे, जैसे कभी कुछ हुआ ही नहीं ! क्या वास्तविकता कभी तुम्हारे समझ में आएगी? वास्तविकता ......? एक बार कुरान पढ़ लो यह जंग कहां तक जारी रहेगी समझ में आ जाएगा। मुसलमान शब्द की परिभाषा है -जिसका अल्लाह के रसूल पर ईमान कायम है, वही मुसलमान है। और जिसका अल्लाह के रसूल पर ईमान कायम नहीं है, वह काफिर है और अल्लाह के रसूलपर ईमान लाने का अर्थ है- कुरान के एक-एक शब्द पर बिना तर्क किए, आंख मूंदकर विश्वास करना। यदि धरती चपटी है तो चपटी ही है,चाहे विज्ञान कितना ही साबित कर दें कि धरती गोल है । यदि धरती को गोल मान लिया तो अल्लाह के रसूल पर ईमान ही कायम नहीं  और जिसका ईमान कायम नहीं वह मुसलमान नहीं और वहां पर अल्लाह के रसूल की अवमानना करने वाले काफिरों की गर्दन काटने पर सीधा जन्नत नसीब होती है। जहाँ पर 72 हूरें मिलती हैं , मजे मारने के लिए।
  सत्यमेव जयते
🕉️ इसी बात को,संदेश को सभ्य शब्दों में समझाया जा सकता था।शालीनता विद्वानों का गहना है।शास्त्रों  में उच्च कोटि के व्यंग्यात्मक शब्द हैं ,जिनका प्रयोग करके सबकी आत्मा को झकझोर कर नव चेतन्य का संचार किया जा सकता है।....का वंशज शब्द उचित नहीं।मर्यादित शब्दों से समाज को जागृत करें।
  जय हिन्द।
               -- महावीर प्रसाद
 🕉️🚩 महावीर प्रसाद जी यही तो समस्या है हमारे सनातन हिंदू समाज की  कि इन्हें चोट लगे बिना कुछ समझ में आता ही नहीं है ! क्या किसी हिंदू की बेरहमी से गर्दन अभी ही पहली बार कटी है? यह सिलसिला तो हजारों वर्षों से जारी है किंतु क्या हमारी आत्मा पर हमारे मन मस्तिष्क पर इसका कोई असर हुआ है ? जब दृश्य आंखों के सामने आता है तो हम बरसाती नदी की तरह उफन जाते हैं और जैसे ही बरसात समाप्त बरसाती नदी बिल्कुल सूख जाती है। उसी प्रकार का हमारा गुस्सा है हम सब कुछ भूल जाते हैं जबकि ईमान वालों के साथ आप कुछ भी गलत कर दो यह प्रत्येक सप्ताह उस गलती को याद करते हैं और जब तक बदला नहीं ले लेते शांत नहीं होते इनके अंदर बदले का ज्वालामुखी अंदर के अंदर धड़कता रहता है क्योंकि इन्होंने ऐसा सिस्टम बना रखा है, जहां पर  ईमान वाले  लोग मिलकर के जेहादी योजनाएं निर्धारित करते हैं ,धन इकट्ठा करते हैं और लक्ष्य को साधते हैं। एक बात स्पष्ट रूप से समझ लीजिए ,यदि हम मिलकर के अभी जंग नहीं छेड़ेंगे तो हमारा अंत एक न एक दिन अवश्य होकर रहेगा। मैं जब 2019 में हिमालय की यात्रा के तहत केदारखंड की तरफ गया तो देखा अधिकांश हिमालय राजस्थानी राजपूतों से भरा हुआ है और ये वे राजपूत हैं जो मुगलों के अत्याचार से जान बचाने के लिए अपना सब कुछ छोड़ कर के पहाड़ों में भाग गए थे। आज वहीं के होकर रह गए हैं किंतु क्या उस स्थिति से हमने कुछ शिक्षा ग्रहण की? यदि भविष्य में हमको कभी भागना पड़ा तो हम भाग कर जाएंगे कहांँ ?क्या ऐसा कोई स्थान अब हमारे लिए शेष बचा है जहां पर ईमान वालों से सुरक्षा की गारंटी मिल जाएगी। अब तो इनका दायरा हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों की और भी बढ़ने लगा है, इसलिए मूर्खों को जगाने के लिए कड़वी भाषा बोलना बहुत जरूरी है क्योंकि मुझे शालीन भाषा बोलते हुए तो बरस हो गए अब तक किसी को कुछ समझ में आया ही नहीं। यहां पर कोई जातिवाद से ऊपर नहीं आना चाहता। यहां पर धर्म किसी के लिए भी महत्वपूर्ण नहीं बल्कि अपनी जेब सबसे महत्वपूर्ण है। बस एन केन प्रकारेण मेरी जेब भर जाए ,धर्म जाए भाड़ में! सत्य यही है हम कल भी गधे थे और हम आज भी गधे ही है शायद गधों से भी गए बिते हैं। तभी तो हम ईमान वालों से शांति की उम्मीद लगा कर बैठे हुए हैं। उस दिन के इंतजार में जब इनकी संख्या उस स्तर पर पहुंच जाएगी जब हम इनसे लड़ने योग्य भी नहीं रहेंगे क्योंकि ये सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से करते हैं और हमारे पास कभी भी कोई पुख्ता योजना होती ही नहीं है। ये सदां वाही नदी है और हम सिर्फ बरसाती नाले। बरसाती नालों के पानी का कोई खास महत्व नहीं होता वह बहकर समुद्र में चला जाता है। जल तो सदां वाही गंगा ,यमुना, सतलुज, ब्रह्मपुत्र एवं सिंधु नदी का ही बहुमूल्य होता है और वही वास्तविक स्थिर परिणाम देने वाला होता है। जिस दिन हमारा गुस्सा स्थिर परिणाम देने वाला हो जाएगा उस दिन मैं कहूंगा कि हिंदुओं में जागृति आयी है। इनका गधा पन निकला है अभी तो सब के सब गधे ही गधे हैं। शायद मैं भी उन्हीं में से एक गधा हूंँ जो गधों को समझाने का प्रयास कर रहा है ,अपने आप को विद्वान समझ कर। किंतु वास्तविकता यही है मैं भी कोई ज्ञानी विद्वान नहीं मैं भी एक गधा ही हूं क्योंकि मैंने भी अभी विद्वान होने जैसा कोई कार्य नहीं किया है। कार्य तो अब तक मेरे भी गधे वाले ही है, बस मैं शेर की खाल ओढ़कर के गधे से शेर बनने का प्रयास कर रहा हूंँ। हो सकता है यह प्रयास करते करते मेरे अंदर कुछ  शेर वाले गुण आ ही जाएं।
     ⚜️🚩 जय श्री राम 🚩⚜️
  ⚜️🚩 सत्यमेव जयते 🚩⚜️
 ⚜️🚩 जय मां आदिशक्ति 🚩⚜️

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