🙏🏽🌸 *श्रीकृष्ण* 🌸🙏🏽
*सूर्य ग्रहण*
_*खण्डग्रास सूर्य ग्रहण 26 दिसम्बर 19 को है । ग्रहण का प्रारम्भ सुबह 08:04 पर होगा , ग्रहण का मध्य 09:31 तथा मोक्ष ( समापन ) 11:43 पर होगा । विभिन्न पंचागों में समय में कुछ भिन्नता है । अतः हम अधिकतम समय स्वीकार करते हैं । ग्रहण एक चमकदार अंगूठी के समान दृष्टिगोचर होगा । गणना के अनुसार ग्रहण की पुनरावृत्ति 296 वर्ष बाद हो रही है । सूर्यग्रहण का सूतक ग्रहण के प्रारम्भ से 12 घण्टे पूर्व से मान्य होता है । अतः देव कार्य 25 दिसम्बर को सांय 08:00 तक ही सम्पन्न होंगे । वृजनिधि श्रीराधारमण देवजु की 25 दिसम्बर को शयन आरती लगभग 7:30 बजे होगी ।*_
📜 _*ग्रहण के समय पालनीय नियम*_ 📜
♻⛳ *सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्य के दाने खाता है, उतने वर्षों तक 'अरुंन्तुद' नरक में वास करता है। ~ (देवी भागवत)*
♻⛳ *सूर्य ग्रहण में ग्रहण से चार प्हरर (12 घंटे) पूर्व और चंद्रग्रहण में तीन प्रहर (9 घंटे) पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बूढ़े, बालक और रोगी डेढ़ प्रहर(साढ़े चार घंटे) पूर्व तक खा सकते हैं।*
♻⛳ *ग्रहण-वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियां डाल दी जाती है, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए।*
♻⛳ *ग्रहण-वेध के के प्रारंभ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग भी अत्यावश्यक परिस्थिति में ही करना चाहिए। और ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए।*
♻⛳ *ग्रहण काल में स्पर्श किए हुए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं भी वस्त्र सहित स्नान करना चाहिए।*
♻⛳ *ग्रहण के स्नान में कोई मंत्र नहीं बोलना चाहिए। ग्रहण के स्नान में गर्म जल की अपेक्षा ठंडे जल, ठंडे जल में भी दूसरे के हाथ से निकाले हुए जल की अपेक्षा अपने हाथ से निकाला हुआ, निकाले हुए की अपेक्षा जमीन में भरा हुआ, भरे हुए की अपेक्षा बहता हुआ, बहते हुए की अपेक्षा सरोवर का, सरोवर की अपेक्षा नदी का, अन्य दिनों की अपेक्षा गंगा का और गंगा की अपेक्षा भी समुद्र का जल पवित्र माना जाता है।*
♻⛳ *ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ना चाहिए। बाल तथा वस्त्र नहीं नहीं निचोड़ने चाहिए व दंतधावन नहीं करना चाहिए। ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना मल मूत्र का त्याग, मैथुन और भोजन— यह सब कार्य वर्जित है।*
♻⛳ *ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।*
♻⛳ *ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीड़ा, स्त्री प्रसंग करने से सूअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी होता है। गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए।*
♻⛳ *3 दिन या 1 दिन उपवास करके स्नान दान आदि का ग्रहण में महाफल है, किंतु संतान युक्त गृहस्थ को ग्रहण और संक्रांति के दिन उपवास नहीं करना चाहिए।*
♻⛳ *भगवान् वेदव्यास जी ने परम हितकारी वचन कहते हैं: सामान्य दिन से चंद्र ग्रहण में किया गया पुण्य कर्म (जप ध्यान दान आदि) एक लाख गुना और सूर्य ग्रहण में 10 लाख गुना फलदायी होता है। यदि गंगाजल पास में हो तो चंद्रग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्य ग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है।*
♻⛳ *ग्रहण के समय भगवान्नाम जप अवश्य करें, ना करने से मंत्र को मलीनता प्राप्त होती है।*
♻⛳ *ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से 12 वर्षों का एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट हो जाता है। (स्कंद पुराण)*
♻⛳ *भूकंप एवं ग्रहण के अवसर पर पृथ्वी को खोदना नहीं चाहिए। (देवी भागवत)*
♻⛳ *अस्त के समय सूर्य और चंद्रमा को रोग भय के कारण नहीं देखना चाहिए। (ब्रह्मवैवर्त पुराण)*
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🙏🏽🌸 *जय श्री राधे* 🌸🙏🏽
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