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Monday, July 8, 2019

हमारा समाज धर्म एवं संस्कार विहीन क्यों होता जा रहा है?

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     ❓प्रश्न - हमारा समाज संस्कार एवं धर्म विहीन  क्यों होता जा रहा है?

                            - बहिन निधि शर्मा जी 
🌞👉बहिन आज हमारा समाज संस्कार एवं धर्म के वास्तविक ज्ञान  से विहीन होता जा रहा हैं क्योंकि शिक्षा के नाम पर सिर्फ अज्ञान परोसा जा रहा है। जो व्यक्ति संस्कृत से स्नातक एवं परास्नातक की डिग्री प्राप्त करता है ,उसे अभिज्ञानशाकुंतलम् , किरातार्जुनीयम् आदि तो पढ़ाये जाते हैं किंतु जो संस्कृत का मूल ज्ञान है -वेद ,उपनिषद ,षड्दर्शन जिनमें विशेष रूप से ब्रह्मविद्या , यज्ञ विज्ञान ,आयुर्विज्ञान ,ज्योतिष विज्ञान आदि का ज्ञान है ,उससे हमेशा दूर रखा जाता है ।हमारी शिक्षा पद्धति इतनी अज्ञानता पूर्ण इतनी  भटकाव वादी  है कि हम अपने पैर स्वयं काट रहे हैं ।न जाने कौन से मूर्खों को पाठ्यक्रम तय करने के लिए बिठा रखा है! जिस संस्कृत को गूंगों की मूर्खों की भाषा वर्तमान में समझा जाता है । आज पाश्चात्य देश उस संस्कृत का महत्व स्वीकार करने लगे हैं । पाश्चात्य जगत को सभी भाषाओं की जननी संस्कृत का महत्व समझ में आ चुका है। कोई भी बड़ा रिसर्च निकल कर जब सामने आता है तो एक ही बात सामने आती है ।यह बात वेदों में लिखी हुई है ।यदि वास्तविक अर्थ में संस्कृत का ज्ञान दिया जाए तो संस्कृत सबसे अधिक रोजगार देने वाली भाषा बन जाएगी ।इसमें कोई संशय नहीं ,जो ज्ञान दिया जाना चाहिए उस ज्ञान को छुपा लिया जाता है । अभिज्ञान शाकुंतलम् के माध्यम से शकुंतला की जंघावों  की, कमर की, स्तनों की बड़े  ही अश्लील तरीके से व्याख्या करके दिखाया जाता है कि यह है हमारी संस्कृति का ज्ञान ।वाह रे !  धर्म द्रोहीयों, पाखंडीयों  ,कपट्टियों आज तो देश स्वतंत्र हो चुका है किंतु तुम्हारी मानसिकता आज भी गुलाम  अंग्रेजों एवं मुस्लिमों की गुलाम है।यदि नहीं होती तो यह पाठ्यक्रम कभी का बदल चुका होता ।संस्कृत पढ़ाने के नाम पर अश्लील महाकाव्य को तो पढ़ा रहे हो किंतु संस्कृत का वह महानतम ज्ञान जो नर को नारायण बना सकता है ।कहांँ  सिखाते हो? कहां प्रैक्टिकल करवाते हो योग विज्ञान का संस्कृत के छात्रों को? कहां प्रैक्टिकल करवाते हो यज्ञ विज्ञान का संस्कृत के छात्रों को? कहां प्रैक्टिकल करवाते हो ज्योतिष शास्त्र का संस्कृत के छात्रों को ? कहां  प्रैक्टिकल करवाते हो आयुर्विज्ञान का संस्कृत के छात्रों को ?नहीं करवाते !आखिरकार हम चाहते क्या हैं ? यही कि सदियों तक हमारी पीढ़ियां अज्ञान के अंधकार में घीरी रहे !! हमारे पतन का कोई और कारण नहीं , हमारे पतन का हम स्वयं ही कारण है ।हम वास्तविक ज्ञान को छुपा कर रखना चाहते हैं और अज्ञानता को पूजना चाहते हैं ।कैसे समाज आगे जाएगा ?बहुत बड़ा प्रश्न है यह!  संस्कृत से जितने छात्र स्नातक की डिग्री प्राप्त करते हैं ,यदि उन्हें संस्कृत का वास्तविक ज्ञान दिया जाए तो वे बेरोजगार होकर नहीं  डोलेंगे, बल्कि समाज को एक नई दिशा धारा की ओर ले कर जाएंगे किंतु वे स्वयं ही संस्कृत पढ़ने के बाद बिल्कुल अज्ञानी बने  रहते हैं क्योंकि उन्हें संस्कृत का वास्तविक ज्ञान दिया ही नहीं जाता। साथ ही कॉन्वेंट विद्यालय में पढ़ने वाले बालक- बालिकाएं भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति को क्या समझेंगे? कैसे समझेंगे ?क्योंकि वहां पर इन मूल्यों के लिए कोई स्थान ही नहीं है और बात रही धर्म की तो धर्म केेेे नाम पर पाखंडवाद का बोलबाला हो गया है, व्यवसाय वाद का बोलबाला हो गया है। यह व्यवसायवााद सत्य सनातन धर्म को खा गया है । वर्तमान मेंं हमें जो सनातन धर्म का स्वरूप दिखाई दे रहा है, यह सिर्फ और सिर्फ पुराणों पर आधारित है जबकि सत्य सनातन धर्म का वास्तविक तत्व दर्शन  वेदांत अर्थात उपनिषदों एवं आगम ग्रंथों  में संग्रहित है और हम देख सकते  कोई कथा वाचक  अपनी कथा में उपनिषदों एवं आगम ग्रंथों का नाम तक नहीं लेता क्योंकि ये ग्रंथ विशुद्ध विज्ञान पर आधारित हैं और पाखंडवाद को जड़ से समाप्त करते हैं। वर्तमान में सत्य सनातन धर्म को नष्ट करने की पुरजोर कोशिश हो रही है और इसमें बहुत बड़ा योगदान इन पाखंडी कथा वाचकों का भी है। जिन्होंने धर्म को सिर्फ और सिर्फ अपना व्यवसाय बना लिया  है और कथाओं केेेेेेे नाम पर अज्ञानता का अंधकार फैला रहे हैं ।
👏 मेरे इस देश के पाठ्यक्रम निर्धारकों एवं कथा वाचकों को शत-शत प्रणाम है। जिनकी वजह से मेरा संपूर्ण देश अज्ञानता के अंधकार में घिरा हुआ है ।डूब मरो  पाखंडीयों! यदि तुम मर जाओगे तो यह देश बच जाएगा । इस देश की महान संस्कृति बच जाएगी। इस देश का गौरव एवं आत्मसम्मान बच जाएगा। इसलिए चुल्लू भर पानी में जल्दी डूब मरो। शुभ कार्य में देरी नहीं करनी चाहिए। देश को स्वतंत्र करवाने के लिए असंख्य वीर सपूतों ने बलिदान दिया था । थोड़ा बलिदान तुम भी दे दो कपटियों ताकि सही शिक्षा नीति एवं सही ज्ञान लागू हो कर देश को अज्ञानता के अंधकार से बाहर निकाल कर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाया जा सके । हांँ यह अवश्य है ,नई शिक्षा नीति मांँ भारती के सच्चे सपूत के नेतृत्व में निर्धारित की जा रही है, इसलिए यह भारतीय सभ्यता संस्कृति के लिए नई प्राण ऊर्जा का कार्य करेगी, इसमें कोई भी संशय नहीं है, कोई संशय नहीं है। निश्चित ही यह शिक्षा नीति फिर से भारतीय सभ्यता एवंं संस्कृति को पुनर्जीवित कर पाने में समर्थ होगी ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है।
                       -- योगाचार्य रामेश्वर मानव
          ⚜️🚩सत्यमेव जयते 🚩⚜️
       ✴️ मांँ आदि शक्ति कुंडलिनी योग, झालरापाटन ✴️
              🚩 जय गुरुदेव 🚩
      ⚜️🚩जय मां आदिशक्ति 🚩

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