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Wednesday, August 7, 2024

सिद्धियां आध्यात्मिक उन्नति में बाधक

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आप जिन सिद्वियों एवं साधना की बात कर रहे हैं ,उन को तो रामचरित मानस ने सिरे से नकार दिया  है।
सत साहेब🙏 🙏
            -- एडवोकेट कंवरलाल मीणा
              
🕉️🚩 बिल्कुल वकील साहब रामचरितमानस में जैसा  लिखा है, जो लिखा है ,वह सही ही लिखा है , बस उसे सही अर्थ में समझने की तत्व दृष्टि की आवश्यकता है। वेदों का अंतिम भाग अर्थात उपनिषद साधना एवं सिद्धत्व को बड़ी गहराई से स्पष्ट करते हैं । उपनिषदों के अनुसार सिद्धियां साधना में बाधक नहीं बल्कि साधना की सिद्धि का स्पष्ट संकेत हैं। सिद्धियां साधक की पूर्णता का संकेत हैं। साधना करते हुए व्यक्तिगत स्तर पर मैंने यही जाना है कि सिद्धियां  बच्चों का खिलौना नहीं हैं, जिसे परमपिता परमात्मा एवं जगत जननी मां ऐसे ही किसी ऐरे गेरे को राह चलते  पकड़ा देते हैं । यदि सिद्धियां सहजता से मिलती होती तो इस दुनिया में अधिकांश महत्वाकांक्षी व्यक्ति सिद्धियां  प्राप्त करके   बहुत बड़े-बड़े चमत्कार दिखा रहे होते, इस दुनिया के मालिक बन गए होते । सिद्धियां तो दृढ़ संकल्पी ,  साहसी, नेक, ईमानदार ,कर्तव्य निष्ठ ,श्रद्धा एवं भक्ति से सराबोर साधक को सृष्टि के कल्याण के हेतु जगत जननी मां द्वारा इनाम स्वरूप प्राप्त होती हैं,और यदि साधक इनका दुरुपयोग करने लगे तो उन्हें वापस छीन भी लिया जाता है। यह संसार चमत्कार को नमस्कार करता है; वर्तमान में भगवान हनुमान जी की स्पष्ट कृपा के जीवंत हस्ताक्षर बागेश्वर धाम सरकार के कार्यक्रमों में जो भीड़ दिखाई दे रही है ,वह सिर्फ चमत्कार को नमस्कार करने पहुंच रही है। कोई भी सिद्धि बुरी नहीं होती, यदि वह मिल जाती है । बस उस सिद्धि को संसार के कल्याण में प्रयोग करना और निर्हंकार रहकर सत्य, धर्म, न्याय, परोपकार के भाव की रक्षा करना। इन्हे बढ़ावा देने के लिए उस शक्ति एवं सामर्थ्य का प्रयोग करना, यही सच्चे आध्यात्मिक व्यक्ति के लक्षण हैं। आप वकील हैं तो आपने वकालत की सिद्धि प्राप्त की है। मैं अध्यापक हूं तो मैंने अध्यापन की सिद्धि प्राप्त की है। कोई डॉक्टर है तो उसने चिकित्सा की सिद्धि प्राप्त की है । एक इंजीनियर ने निर्माण कार्य की सिद्धि प्राप्त की है । साइकिल चलाने वाले ने साइकिल चलाने की सिद्धि प्राप्त की है।  ड्राइवर ने गाड़ी चलाने की सिद्धि प्राप्त की है । इसी प्रकार से जो व्यक्ति जिस व्यवसाय को कर रहा है उसने उस व्यवसाय में सिद्धि प्राप्त की है और यदि कोई अध्यात्म के पथ पर आगे बढ़ता है और उसे इस पथ पर आगे बढ़ते हुए सिद्धत्व  प्राप्त नहीं होता तो यह स्पष्ट है उसने अभी साधना के सोपानों को चड्ढा ही नहीं है। यदि वह साधना के किसी स्तर पर पहुंचता तो उसे उस मार्ग में आने वाला कोई ना कोई अनुभव एवं इनाम निश्चित रूप से मिल गया होता। सिद्धियां साधना का पुरस्कार होती हैं न कि लक्ष्य।  किसान खेती करेगा, अच्छी तरह से फसल की देखरेख करेगा तो फसल पक ही जाएगी। वह चाहे उद्देश्य लेकर के करें या ना करें! बस वह अपनी मेहनत करें तो समय आने पर उसे फल अवश्य मिलेगा। यही हमारी साधना के साथ है और यदि साधना करते हुए भी हमें सिद्धि का अनुभव नहीं हो पाया तो हमारी साधना का मार्ग गलत है, अधूरा है ,अज्ञानता युक्त है। सिद्धियां साधना की सफलता की सूचक होती हैं। बस इन्हीं में अटक जाना, इन्हीं में भटक जाना यहां पर ही सावधानी रखने की आवश्यकता होती है। यदि सिद्धि के चमत्कार दिखाने एवं अपने आप का महिमा मंडन करवाने में लग गया तो उसकी आध्यात्मिक यात्रा रुक जाती है और वह यदि इन सिद्धियों को अपने साधन की सफलता के संकेत समझकर इनका आंशिक प्रयोग मानव मात्र के कल्याण में करते हुए निरंतर अध्यात्म पथ पर आगे बढ़ता रहा तो वह उस सत्य स्वरूप परब्रह्म परमात्मा के अस्तित्व में विलीन होने की पूर्ण सामर्थ्य प्राप्त कर लेता है। वह कर्मों के बंधन से छूट जाता है ।
                 -- सनातनी हिंदू योगाचार्य रामेश्वर मानव
                    ( मेरी संपूर्ण पहचान) 
    ⚜️🚩 सत्यमेव जयते 🚩⚜️
  ⚜️🚩 जय श्री राम 🚩⚜️ 
⚜️🚩 जय गुरुदेव 🚩⚜️
  ⚜️🚩जय मां आदि  शक्ति 🚩⚜️

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