🕉️🚩 आप सभी आत्मीय परिवार जनों को भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव कृष्ण जन्माष्टमी पावन पर्व की हार्दिक मंगल कामनाएं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं ।
🚩👏 धर्म, कर्म, विवेक, ज्ञान ,नीति, मानवीय मूल्य एवं संघर्ष के प्रतिनिधि परमात्म गुणों के आगार भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर हम संकल्प लें कि हम हमारी दिव्य सद्गुणों युक्त अवतारी चेतनाओं के जीवन चरित्र से उनके जीवन में विद्यमान विशेषताओं को हम अपने अंतस्थ में धारण करने का भरसक प्रयास करते रहेंगे। हम शक्तिहीनता की प्रतीक अपनी बुराइयों को दूर करके शक्ति के वाहक सद्गुणों को अपने अंतस्थ में धारण करने का सतत प्रयास करते रहेंगे ।
👏 आओ इस पावन अवसर पर हम सगुण उपासना का मर्म समझें-- सगुण उपासना का यही मर्म है कि हम हमारी अवतारी चेतनाओं के गुणों की उपासना करके उन गुणों को अपने अंतस्थ में धारण करें और उन्हीं के समान बनने का सतत प्रयास करते रहें। हम उन्हीं गुणों को अपने अंतस्थ में विकसित करें जो हमारी विभूतियां में थे । सगुण उपासना का अर्थ गुणों की उपासना करने से हैं, उस परम चेतना की गुणों के साथ उपासना करने से है ,ना कि किसी मूर्ति या चित्र के आगे बैठकर के भाग्यवादी विचारधारा को अपना लेना । यम, नियम का पालन करते हुए आसन ,प्राणायाम ,धारणा ,ध्यान एवं मंत्र जप का अभ्यास करते हुए उस अस्तित्व से ,उसी के गुणों के साथ अपने अंतस्थ में उतर आने का अनुनय विनय करना, प्रार्थना करना, निवेदन करना और निवेदन करते-करते उस अस्तित्व से उन्हीं दिव्य गुणों के साथ एकाकार हो जाना । अपने आप को भूल करके उन्हीं गुणों में खो जाना। "तू मुझ में है मैं तुझ में हूं। तू ही तू है, मैं ही मैं हूं। " इस अनुभूति के आनंद से सराबोर हो जाना। "यहां तू ही तो है तेरे अलावा कोई और नहीं" ,यहां "मैं ही तो हूं ,मेरे अलावा कोई और नहीं"। इस अस्तित्व बौद्ध में खो जाना या इस अनुभूति तक पहुंचने का निरंतर अभ्यास करते रहना , यही सगुण उपासना है । सिर्फ किसी चित्र या मूर्ति के आगे दो अगरबत्ती जला करके पूजा पाठ कर लेना और समस्त दुर्गुणों को अपने अंतस्थ में धारण करके दिन भर राक्षसी प्रवृत्तियों के साथ जीवन व्यतीत करते रहना। यह सगुण उपासना नहीं बल्कि यह दुर्गुणों की उपासना है! यह ज्ञान की नहीं अज्ञान की उपासना है ! यह विवेक की नहीं अविवेक की उपासना है ! यह राम की नहीं रावण की उपासना है ! यह कृष्ण की नहीं कंस की उपासना है। यह धर्म की नहीं अधर्म की उपासना है। धर्म के रक्षक भगवान श्री कृष्ण में जो गुण थे ,यदि हम उन गुणों की उपासना न कर सके तो हम वास्तविक अर्थ में श्री कृष्ण के उपासक नहीं ,हम सिर्फ मूर्खता एवं अज्ञानता के उपासक हैं । हम गुणों के नहीं दुर्गुणों के उपासक हैं। हम परम आत्मा के नहीं दुरात्मा के उपासक हैं। हम राम एवं कृष्ण के नहीं रावण एवं कंस के उपासक हैं ।
🚩👏 आओ सच्चे अर्थ में सगुण उपासना करें ,भगवान श्री कृष्ण की उपासना करें ,भगवान श्री राम एवं मां आदिशक्ति की उपासना करें। उन दिव्य गुणों को अपने अंतस्थ में विकसित करने का प्रयास करें जो हमारी विशिष्ट विभूतियों के व्यक्तित्व में दिखाई देते हैं । यदि हम ऐसा कर सके तो भगवान श्री कृष्ण की भगवान राम की, भगवान शिव की ,मां आदिशक्ति की हमारे द्वारा की गई यह सर्वश्रेष्ठ पूजा, प्रार्थना, उपासना होगी।
🚩👏 देवकीनंदन वासुदेव भगवान श्री कृष्ण, सदगुरुदेव एवं जगत जननी मां आदिशक्ति राधा रानी की कृपा। हम सब पर हमेशा बनी रहे । हम उन्हीं के गुणों को धारण करके उन्हीं के समान बनने का निरंतर प्रयास करते रहें।
👏भगवान श्री कृष्ण ,सद्गुरुदेव एवं जगत जननी मां से यही प्रार्थना है।
🔥नंद के आनंद भयो - जय कन्हैया लाल की ।
🔥हाथी घोड़ा पालकी - जय कन्हैया लाल की ।
👏 एक बार फिर से आप सभी आत्मीय परिवार जनों को श्री कृष्ण जन्माष्टमी पावन पर्व की हार्दिक मंगल कामनाएं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
⚜️🚩 जय श्री कृष्ण 🚩⚜️
⚜️🚩 जय श्री राधे 🚩⚜️
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