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Tuesday, May 10, 2022

विज्ञान भैरव तंत्र-14

🕉️🚩 विज्ञान भैरव तंत्र 🚩⚜️
       🌞 धारणा -8 🌞
https://maa-aadishaktikundaliniyog.in/
⚜️🚩 माता पार्वती को उस परमपिता परमात्मा के बौद्ध भैरव स्वरूप को प्राप्त करने का विज्ञान समझाते हुए भगवान शिव कह रहे हैं- हे पार्वती उस प्राण शक्ति के द्वारा तथा  भ्रू भेदन के सेतु से उस द्वादशांत को तोड़कर ,मन को विकल्प रहित करके अर्थात निर्विकल्प बनाकर सबसे ऊपर अर्थात द्वादशांत से भी ऊपर परमाकाश में सर्वव्यापकता का उदय होता है।
⚜️🚩 साधक के दो शब्द- इस धारणा के माध्यम से भगवान शिव समझा रहे हैं कि  जब साधक साधना के पथ पर आगे बढ़ते हुए  अपनी प्राणशक्ति  अर्थात कुंडलिनी ऊर्जा को जागृत कर लेता है और उसकी सहायता से भ्रूमध्य अर्थात आज्ञा चक्र का भेदन कर लेता है तो इसके परिणाम स्वरूप  साधक का मन मस्तिष्क संकल्प विकल्प रहित अर्थात निर्विकल्प हो जाता है। ऐसी स्थिति में साधक का प्राण शिखा के अंतिम भाग अर्थात व्यापिनी चक्र को भी भेदकर उससे भी ऊपर परमाकाश में विलीन हो जाता है। ऐसी स्थिति में साधक स्वयं उस भैरव स्वरूप को धारण कर लेता है जो इस सृष्टि का मूल कारण है अर्थात साधक की चेतना विराट के अस्तित्व पूर्ण निराकार में एकाकार हो जाती है। डूब जाती है, खो जाती है, समाधिस्थ  हो जाती है।
   ⚜️🚩 सत्यमेव जयते 🚩⚜️
 
    ⚜️🚩 जय गुरुदेव 🚩⚜️
   ⚜️🚩 जय मां आदिशक्ति 🚩⚜️

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