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Tuesday, May 17, 2022

विज्ञान भैरव तंत्र धारणा-12

🚩 विज्ञान भैरव तंत्र 🚩🕉️
   🌞 धारणा- 12 🌞
https://maa-aadishaktikundaliniyog.in/
🔥 माता पार्वती को आत्म ज्ञान प्राप्ति का विज्ञान समझाते हुए भगवान शिव कहते हैं- कि हे पार्वती मध्य नाड़ी अर्थात सुषुम्ना शरीर के मध्य में स्थित है। उस कमल नाल के सूत्र के समान सूक्ष्म  चिदाकाशमयी  देवी का ध्यान करने पर परमपिता परमात्मा का वह भैरव स्वरुप प्रकट हो जाता है ।

🚩🔥 साधक के दो शब्द- विज्ञान भैरव तंत्र की संस्कृत भाषा में उपलब्ध सर्वमान्य व्याख्या के अनुसार अधिकांशतया उपलब्ध ग्रंथों में सुषुम्ना नाड़ी का स्थान शरीर का मध्य भाग हृदय माना गया है जो कि वैदिक ग्रंथों एवं हमारे व्यक्तिगत अनुभव के अनुसार प्रासंगिक नहीं ठहरता । शरीर का मध्य स्थान हृदय नहीं बल्कि मूलाधार चक्र है, इसलिए अब तक उपलब्ध ग्रंथों की प्रचलित व्याख्या इस संबंध में हमें उचित दिखाई नहीं देती। हमारे अनुसार बाहरवी धारणा की वास्तविक व्याख्या यही है-कि इडा एवं पिंगला के मध्य में स्थित होने वाली मध्य नाड़ी सुषुम्ना शरीर के मध्य भाग जन्माग्र एवं कन्द चक्र या मूलाधार चक्र में स्थित  है। सूक्ष्मता के कारण वह मृणाल तंतु के समान भीतर से पोली  है। इस मध्य नाड़ी के भीतर  चिदाकाशरूप शून्य का निवास है ।उस सुषुम्ना के भितर पराशक्ति का ध्यान करने से प्राण शक्ति का बहिर्गमन होता है और इस विमर्श से प्रकाश का प्रादुर्भाव होता है। यह प्रकाश ही उस परमपिता परमात्मा के बौद्ध भैरव स्वरूप का ज्ञान करवाता है या यह प्रकाश ही वह बोध भैरव स्वरूप है। स्पंदकारिका में इस संबंध में कहा गया है-- जब उस महाकाश में, जिसमें सूर्य और चंद्र का प्रकाश भी विलीन हो जाता है ,सुषुप्ति अवस्था के सदृश ऐसी विशेष जागृत अवस्था होती है,जिसमें गुप्त शिव तत्व आविर्भूत होता है।
      ⚜️🚩 सत्यमेव जयते⚜️
        ⚜️🚩 जय गुरुदेव 🚩⚜️
   ⚜️🚩 जय मां आदिशक्ति 🚩⚜️

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