🕉️🚩 विज्ञान भैरव तंत्र 🚩🕉️
🌞 धारणा 11 🌞
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🌞 माता पार्वती को परमपिता परमात्मा के बौद्ध भैरव स्वरूप का आत्म साक्षात्कार करने की धारणा का विज्ञान समझाते हुए भगवान शिव कहते हैं- हे पार्वती कपाल के अंदर मन को लगा कर नेत्र बंद कर बैठा हुआ योगी क्रम से मन में दृढ़ता को धारण कर उत्तम से उत्तम लक्ष्य को देखें।
🌞🚩 साधक के दो शब्द- इस धारणा के माध्यम से भगवान शिव माता पार्वती को समझा रहे हैं कि एक योगी को अपने सिर में अर्थात कपाल के भीतर नेत्र बंद करके धारणा ,ध्यान, समाधि का अभ्यास करना चाहिए। इस अभ्यास को बार बार दोहराने से साधक में दृढ़ता का उदय होता है और इस दृढ़ता के परिणाम स्वरूप साधक दिन प्रतिदिन उच्च से उच्चत्तर शिखर की ओर आगे बढ़ता चला जाता है और अंततः अपने ज्योति स्वरूप का आत्मबोध प्राप्त कर लेता है अर्थात योगी अपने बोध भैरव स्वरूप को जान लेता है। तंत्रकोष ग्रंथ के अनुसार " कपाल "शब्द का अर्थ "क" से' पराशक्ति 'और "पाल" से 'शिव' अर्थ लिया गया है । इस आधार पर कपाल शब्द का वास्तविक तत्वार्थ "जहां पर शिव एवं शक्ति का संयुक्त स्वरूप स्थित हो" वही कपाल" है। इस शरीर रूपी शिव शक्ति के मंदिर में कपाल ही वह स्थान है जहां पर शिव एवं शक्ति का मिलन होता है और यहीं से शिव शक्ति का संयुक्त स्वरूप अपने आप को विस्तृत करते हुए व्यापिनी चक्र से भी ऊपर पहुंच कर अपने विराट अस्तित्व अर्थात अपने बौद्ध भैरव स्वरूप को प्रकट करता है।
⚜️🚩 सत्यमेव जयते 🚩⚜️
⚜️🚩 जय गुरुदेव 🚩⚜️
⚜️🚩 जय मां आदिशक्ति 🚩⚜️
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