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🕉️🚩 भगवान श्री हरि विष्णु के प्रथम अवतार भगवान मत्स्य अवतार जयंती की आप सभी आत्मीय परिवार जनों को हार्दिक शुभकामनाएंँ।
👏 भगवान मत्स्य नारायण की कृपा आप सब पर हमेशा बनी रहे।
🕉️👏 आइए इस पावन एवं पुण्य अवसर पर हम मत्स्य अवतार का वैज्ञानिक रहस्य समझें---विज्ञान की मान्यता है कि सृष्टि के उद्भव के बाद जब संपूर्ण सृष्टि में जीवन की उत्पत्ति हुई तो सर्वप्रथम जल में जीवन की उत्पत्ति हुई। प्राणियों की उत्पत्ति का जीवन चक्र जल से प्रारंभ हुआ और बाद में यह थल तक आया अर्थात उस कण कण में व्याप्त विष्णु रूपी चेतना ने सर्वप्रथम जीवन के रूप में अपने आप को मत्स्य अर्थात मछली के रूप में प्रकट किया। बाद में जल से वह विष्णु रूपी चेतना थल पर प्रकट हुई अर्थात यह जीवन का चक्र थल तक आया और उस विष्णु रूपी कण-कण में व्याप्त चेतना ने जल से अपने आप को कीचड़ ,गंदगी एवं भूमि में रहकर जीवन यापन जो कर सके ऐसी चेतना के रूप में प्रकट किया अर्थात उसने वाराह अवतार धारण किया। उसी विष्णु ने अपने आपको विस्तृत एवं विकसित करते हुए हिंसक पशुओं के रूप में भी अपने आप को प्रकट किया अर्थात नर सिंह के रूप में प्रकट किया और विकास की इसी प्रक्रिया में उसी कण-कण में व्याप्त विराट अस्तित्व धारी विष्णु ने नर रूप में मां के गर्भ से छोटे से वामन रूप को धारण किया। समय काल परिस्थितियों की आवश्यकता के अनुसार वह परम चेतना अलग-अलग रूपों में प्रकट होती है। यह संपूर्ण ब्रह्मांड उसी का विस्तार है। उसने अजन्मा होकर भी अपने आप को इस रूप में विस्तृत कर लिया है
। यह सब उसकी माया है उसका खेल है ।यही अवतारवाद का सिद्धांत है। जिस व्यक्ति में सत्य, धर्म ,न्याय, परोपकार का भाव जितने अधिक अंश तक विद्यमान है, वह उतने ही अंश में साक्षात विष्णु का ही जीवंत स्वरूप है। हमारे अंदर मानवीय गुणों का होना ही हमें अवतार की श्रेणी में खड़ा करता है और हमारे अंदर दुर्गुणों का होना ही हमें राक्षसों की श्रेणी में खड़ा करता है। देखा जाए तो हम सब उस कण कण में व्याप्त विष्णु रूपी चेतना के अवतार ही हैं ,बस हम स्वयं का मूल्यांकन करें कि हमारे अंदर कितने अंश में वह जीवित है और कितने अंश में वह मर गया है ।वहां पर कितने अंश तक हिरण्यकश्यप, हिरण्याक्ष, सहस्त्रबाहु ,रावण या कंस ने स्थान ग्रहण कर दिया है। हम अपने आप का मूल्यांकन करते रहें और अपने अंदर से राक्षसी प्रवृत्तियों का अंत करते रहें तो निश्चित रूप से हम भी अवतार ही हैं ,बस आवरण हटाने की देर है स्वरूप प्रकट हो जाएगा।अवतार ही बन जाएंगे बस हमें अपने आप को रूपांतरित करने की आवश्यकता है ।अधर्म एवं अन्याय का विरोध करने का साहस उत्पन्न करना है जबकि सत्य धर्म एवं न्याय के लिए लड़ने का जज्बा अपने अंतस्थ में भरना है । यदि हम ऐसा कर सकें तो हम भी उसी स्थिति में खड़े हो सकते हैं ,जहां पहुंचने पर किसी भी व्यक्तित्व को अवतार कह दिया जाता है। अवतारवाद की अवधारणा सृष्टि में जीवन के उत्पत्ति एवं विकास क्रम को दिखाती है किंतु यह रहस्यात्मक है । यह कुछ वैज्ञानिक आधार पर तो है किंतु कुछ उलझी हुई भी है और यहीं से धर्म की विडंबना की शुरुआत होती है।"आस्था एवं विश्वास" यही धर्म एवं अध्यात्म की मूल पूंजी है। यह संसार भाव से बंधा है और भाव पर ही टिका है । इसलिए आप अपनी श्रद्धा पर दृढ़ बने रहें तब तो आपका भगवान हमेशा जीवित है और यदि आपकी आस्था ढीली पड़ गई किसी ने उसमें संशय उत्पन्न कर दिया तो फिर आपका भगवान भी मृत हो जायेगा । इसलिए अपनी आस्था को हमेशा दृढ़ बनाए रखिए क्योंकि यही उस परमपिता परमात्मा एवं जगत जननी मां के प्रति हमारा सच्चा समर्पण है । यही उसके होने एवं नहीं होने का आधार है । यदि विधर्मीयों एवं धर्म के गद्दारों के बहकावे में आ करके आप अपनी आस्थाओं पर ही संशय उत्पन्न करने लगेंगे तो फिर आपके अंदर दृढ़ आस्था एवं विश्वास कभी भी कायम नहीं हो सकेगा और यहीं से धर्म से विमुख होने की प्रक्रिया की शुरुआत होती है । मेरे आत्म परिवारजनों बस अपनी आस्था एवं विश्वास को हमेशा दृढ़ बनाए रखिए । किसी के बहकावे में इसे कभी कमजोर मत होने दीजिए ।आपकी यह दृढ़ता ही उस परमपिता परमात्मा एवं जगत जननी मां को आप के विश्वास के अनुरूप आकार ग्रहण करने पर मजबूर करती है। यही अध्यात्म जगत का शाश्वत सत्य है। आप उसे निराकार मानेंगे तो वह निराकार ही है और यदि आपने उसे साकार माना तो वह साकार ही है। इसमें कोई संशय नहीं होना चाहिए।
🚩👏 एक बार फिर से आप सभी धर्म प्रेमी आत्मीय परिवार जनों को भगवान मत्स्य नारायण जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं ,अनंत मंगल कामनाएं। आप सब पर भगवान मत्स्य नारायण की कृपा हमेशा बनी रहे।
⚜️🚩 जय मीनेश 🚩⚜️
⚜️🚩 जय श्री राम 🚩⚜️
⚜️🚩 जय गुरुदेव 🚩⚜️
⚜️🚩 जय मां आदिशक्ति 🚩⚜️
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