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Tuesday, April 16, 2024

शक्ति के सहयोग से ही शव शिव कैसे बनता है?

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❓शक्ति के सहयोग से शव शिव कैसे ??

                   --  अनंत आकाश राठौर
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🌞 अनंत आकाश राठौर जी ॐ जय मां आदिशक्ति! आपकी जिज्ञासा का समाधान करतॆ हुए प्रथमत: हमें यह समझना होगा कि शिव एवं और शक्ति का स्वरूप क्या है? शिव अर्थात जो सृष्टि का कल्याणकारी मूल तत्व है उसका वास्तविक स्वरूप क्रिया हीन है। जब उस अक्रिय तत्व में मां आदि शक्ति की ऊर्जा सम्मिलित होती है, तब वह क्रियाशील होता है। एक साधक साधना की उच्च अवस्था अर्थात निर्विकल्प समाधि में पहुंचने के बाद इसी सत्य का आत्म साक्षात्कार करता है। पंचभूत तत्व (पृथ्वी जल अग्नि वायु आकाश) इन्हीं पंच तत्वों की पंच तन्मात्राएं , मन, बुद्धि, अहंकार के साथ पांच ज्ञानेंद्रियां ,पांच कर्मेंद्रियां इन सब का सम्मिलित स्वरूप  प्रकृति है। यही मां आदिशक्ति का स्वरूप है जो एक व्यक्ति के अंदर समाया हुआ है। इन्हीं सब तत्वों से मनुष्य शरीर में संपूर्ण क्रियाएं घटित होती है और यही सब तत्व संपूर्ण ब्रह्मांड को संचालित करने के पीछे क्रियात्मक कारण हैं । शरीर में रहने पर यह सब तत्व व्यष्टि मन अर्थात व्यक्तिगत मन का हिस्सा होते हैं जबकि ब्रह्मांड व्यापी स्तर पर ये समष्टि मन अर्थात संपूर्ण ब्रह्मांड के नियंता शिव शक्ति के मन के रूप में परिलक्षित होते हैं ।यही सब तत्व सब कुछ करते हैं और जानते भी हैं। शिव साक्षी रूप है उसकी उपस्थिति में यह सब कुछ घटित होता है किंतु वह इस क्रिया में भाग नहीं लेता। यह क्रिया मां आदिशक्ति अर्थात प्रकृति के द्वारा ही संपन्न होती है किंतु इस सत्य को यदि कोई व्यक्ति समझना भी चाहे  तो स्पष्ट रूप से समझ नहीं सकता  क्योंकि  अग्नि से जिस प्रकार से जलाने की  शक्ति को अलग नहीं देखा जा सकता उसी प्रकार शिव से  उसकी शक्ति को अलग नहीं देखा जा सकता। शिव को अर्धनारीश्वर  कहा गया है  वह इसीलिए कि वह दोनों को अपने साथ समाहित किए हुए है।यदि शिव से शक्ति को अलग कर दिया जाता है तो फिर वह शव ही बचता है। जब साधना करते हुए साधक समाधि की अनंत गहराई में संपूर्ण क्रियाओं से शून्य होकर निर्विचार अवस्था को प्राप्त कर लेता है तब वह शिव के वास्तविक  स्वरूप को जानता है और तब वह शक्ति से हीन, क्रिया से हीन बिल्कुल अक्रिय तत्व के रूप में अपने आप को देखता है और यह स्थिति शव के रूप में सामने आती है और जब वह शव बन जाता है उसके बाद न तो देखने वाला बचता है न दिखाने वाला क्योंकि शव न तो देख सकता है न दिखा सकता है। यही तत्व विज्ञान के द्वारा खोजा गया गॉड पार्टिकल है  जो जड़ -चेतन सब में समान रूप से विद्यमान है । यहां पहुंचने के बाद  सिर्फ  शून्य बचता है बिल्कुल शून्य । यह सृष्टि का मूल तत्व है और जो योगी साधक स्वयं अपने अंदर उतर कर साधना की अनंत गहराई में इस सत्य को जान लेता है।वह सृष्टि रचना के संपूर्ण सत्य को समझ पाने में समर्थ हो जाता है। जिसे अध्यात्म की भाषा में ,वैदिक भाषा में ऋषि कहते हैं वह आधुनिक भाषा में साइंटिस्ट कहलाता है वैज्ञानिक कहलाता है।
                     
    ⚜🚩 सत्यमेव जयते 🚩⚜

           जय गुरुदेव
   ⚜🚩जय मां आदिशक्ति🚩⚜

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