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Monday, October 28, 2019

भगवान ब्रह्मा जी को विष्णु जी समझा रहे हैं बात समझ में नहीं आई, बड़ा कौन?

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❓ भगवान ब्रह्मा जी को भगवान विष्णु समझा रहे हैं।यह बात कुछ समझ में नहीं आई.....!! इनमें कौन बड़ा एवं कौन छोटा है?
                - महेंद्र मिरल जी
Mahender Mirrl जी ॐ ब्रह्मा जी की उत्पत्ति भगवान विष्णु के नाभि कमल से मानी जाती है तो निश्चित रूप से ब्रह्मा जी का उद्भव भगवान विष्णु से ही हुआ है।  बडे एवं छोटे का तो यहां पर कोई प्रश्न नहीं है क्योंकि इस संपूर्ण ब्रह्मांड में एक ही आत्म तत्व व्याप्त है।वह आत्म तत्व पूर्णब्रह्म परमात्मा का चेतन अंश ही है चाहे वह किसी भी रूप में विद्यमान हो किंतु यदि स्थूल आकार के दृष्टिकोण से आप देखेंगे तो ब्रह्माजी ज्यादा बड़े हैं और यदि सूक्ष्म दृष्टिकोण से देखेंगे तो भगवान विष्णु अधिक व्यापक एवं विस्तृत है क्योंकि जो सूक्ष्म  रूप में इस ब्रह्मांड के कण-कण में व्याप्त हैं, वही विष्णु है। उसे हम ब्रह्मा विष्णु महेश चाहे जो कहें किंतु इन त्रिदेव में भी उसी पूर्णब्रह्म परमात्मा की शक्ति का ही संचार हो रहा है। वैसे सूक्ष्म तत्वों से स्थूल तत्वों का निर्माण हुआ है और भगवान विष्णु सत्व गुण के प्रतीक हैं और सतोगुण रजोगुण से अधिक सूक्ष्म है श्रेष्ठ है  उत्तम है इसलिए भगवान विष्णु ब्रह्माजी से अधिक श्रेष्ठ एवं बड़े हैं। अब यहां पर आपकी जिज्ञासा उठ सकती है कि भगवान महेश सबसे छोटे हैं!!? तो त्रिगुणात्मक प्रकृति में निश्चित रूप से भगवान महेश को छोटा ही माना जाएगा क्योंकि वे तमोगुण के प्रतीक हैं। यह संपूर्ण संसार प्रकृति के तमोगुण के कारण ही स्थूल रूप में दिखाई देता है। स्थूलता, जड़ता ,आलस्य प्रमाद तमोगुण की प्रकृति है, स्थिति है ।क्रिया एवं चंचलता रजोगुण की प्रकृति है ,स्थिति है एवं प्रकाश ,दिव्यता, स्थिरता एवं आनंद सतोगुण की प्रकृति एवं  स्थिति है। जिन भगवान शिव को पूर्णब्रह्म परमात्मा के रूप में संबोधन किया जाता है ,वे शिव परमात्मा त्रिदेव से अलग पूर्ण ब्रह्म परमात्मा का ही नाम है जो संपूर्ण ब्रह्मांड की वास्तविक नियंता शक्ति है।
                      - रामेश्वर हिंदू
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    ⚜🚩 जय मां आदिशक्ति 🚩⚜

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