Wikipedia

Search results

Monday, October 28, 2019

स्वार्थ शब्द का व्यवहारिक एवं आध्यात्मिक जीवन में अर्थ क्या है?

🕉🌞🌞🌞🚩🌞🌞🌞🕉
                 ⚜🚩⚜
❓ व्यवहारिक जीवन  एवं आध्यात्मिक अर्थ में स्वार्थ शब्द का क्या अर्थ है? इसे किस प्रकार से समझे?
            ⚜🚩⚜
🌞👉व्यवहारिक अर्थ में जनसामान्य स्वार्थ शब्द को अपने व्यक्तिगत हित के संबंध में ही सोचने वाले अर्थ से जोड़कर देखता है। व्यवहारिक दृष्टि से देखने पर यह शब्द किसी व्यक्ति विशेष के शारीरिक हित को लक्ष्य करके संबोधन करने वाला शब्द है किंतु आध्यात्मिक दृष्टिकोण से स्वार्थ का अर्थ स्वः अर्थात अपनी आत्मा का हित जिसमें छिपा हो वह स्वार्थ है अर्थात स्वार्थ वह शब्द है जो अपनी आत्मा का कल्याण करता हो और अपनी आत्मा का कल्याण सिर्फ और सिर्फ परमार्थ से होता है व्यक्तिगत खुदगर्जी पूर्ण आचरण से नहीं। इसलिए जिस व्यक्ति को अपनी आत्मा का कल्याण चाहिए उसे खुदगर्ज नहीं बल्कि परोपकारमयी होना चाहिए और जिसे अपने शरीर का हित चाहिए ।वह अवश्य खुदगर्जी पूर्ण आचरण कर सकता है किंतु इससे भी उसका हित होने वाला नहीं है क्योंकि अंततः इससे भी उसका अहित ही होगा। मनुष्य को खुदगर्जी पूर्ण कार्य करने पर तात्कालिक लाभ चाहे दिखाई देता हो किंतु वास्तविक दृष्टिकोण में उस लाभ में लाभ नहीं हानि ही होती है।
                      - रामेश्वर हिंदू
    ⚜ सत्यमेव जयते ⚜
  ⚜🚩 जय मां आदिशक्ति 🚩⚜

No comments:

Post a Comment

मंदिर की पुकार

🕉️🚩🚩 मंदिर की पुकार🚩🚩🕉️ 🕉️ रुको ! रुको ! अरे! कुछ देर रुको!  कहां देखते हो ? मैं कोई और नहीं!   मैं वही हूं ,जिसके दरवाजे पर तुम खड़े...