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❓ नाद श्रवण के लिए किस विधि का अनुसरण करें?
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🌞👉Sushil Tawaniya जी ॐ
👉यदि आप नाद ब्रह्म का साक्षात्कार करना चाहते हैं तो आप इस साधना विधि का अनुसरण कीजिए --
👉प्रारंभ में आप अनुलोम-विलोम नाड़ी शोधन प्राणायाम का 7 से 10 मिनट नाभि में अरुणिमा युक्त सूर्य का ध्यान करते हुए अभ्यास कीजिए ।इसके पश्चात कपालभाति प्राणायाम 3 से 5 मिनट ध्यान नाभि पर ही अरुणिम सूर्य का,तत्पश्चात आप भ्रामरी प्राणायाम का सहस्रार चक्र में श्वेत शीतल प्रकाश का ध्यान करते हुए 3 से 5 मिनट अभ्यास कीजिए। प्राणायाम की क्रिया समाप्ति के पश्चात आप नाभि में अरुणिम सूर्य का ध्यान करते हुए 15 मिनट "रं" बीज मंत्र या गायत्री महामंत्र का मौन मानसिक जप करते हुए ध्यान कीजिए। इसके पश्चात ध्यान को आज्ञा चक्र पर ले आइए और श्वेत शीतल प्रकाश का 30 मिनट तक आज्ञा चक्र पर ध्यान करते हुए गायत्री महामंत्र का मौन मानसिक जप कीजिए । प्रारंभिक साधक के लिए मंत्र जप माला से करना ही श्रेष्ठ रहता है। न्यूनतम पांच माला गायत्री महामंत्र का जप अवश्य करें।दैनिक संध्या के समय सुबह शाम यह साधना पद्धति अपनायी जानी चाहिए किंतु शाम के समय यदि पेट खाली नहीं है तो कपालभाति प्राणायाम नहीं करें और नाभि पर ध्यान भी नहीं करें ।सिर्फ अनुलोम-विलोम नाड़ी शोधन प्राणायाम एवं भ्रामरी प्राणायाम करके आज्ञा चक्र पर श्वेत शीतल प्रकाश का ध्यान करते हुए गायत्री महामंत्र का जप कम से कम 30 मिनट तक अवश्य करें। इस जप को धीरे धीरे 45 मिनट तक लेकर जाएं । बस 3 महीने इतना सा कीजिए । इसके पश्चात मुझसे संपर्क कीजिए । साधना पद्धति में थोड़ा सा बदलाव होगा।नाद ब्रह्म का वास्तविक सत्य आपके समक्ष निश्चित रूप से प्रकट होगा।
-- रामेश्वर हिंदू
⚜🚩 सत्यमेव जयते 🚩⚜
🌞👉 अखिल विश्व गायत्री परिवार अकलेरा
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Thursday, September 12, 2019
नाद श्रवण के लिए किस विधि का अनुसरण करें?
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