🕉🌞श्वेताश्वरोपनिषद 🌞🕉
🚩द्वितीय अध्याय 🚩
👉 प्रथम अध्याय में परम देव परमात्मा के साक्षात्कार का प्रधान उपाय ध्यान को बताया गया है ।उस ध्यान की प्रक्रिया बताने के लिए दूसरा अध्याय प्रारंभ किया जाता है ,इसमें पहले ध्यान की सिद्धि के लिए परमात्मा से प्रार्थना करने का प्रकार बताया जा रहा है--
🌞👉 सब को उत्पन्न करने वाले परमात्मा पहले हमारे मन और बुद्धि की वृत्तियों को तत्व की प्राप्ति के लिए अपने दिव्य स्वरुप में लगाएं और अग्नि आदि इंद्रियाभिमानी देवताओं की जो विषयों को प्रकाशित करने की सामर्थ्य है ,उसे दृष्टि में रखते हुए बाह्म विषयों से लौटा कर हमारी इंद्रियों में स्थिरता पूर्वक स्थापित कर दें ।जिससे हमारी इंद्रियों का प्रकाश बाहर न जा कर बुद्धि और मन की स्थिरता में सहायक हो।
🌞👉 हम लोग सब को उत्पन्न करने वाले परम देव परमेश्वर की आराधना रूप यज्ञ में लगे हुए मन के द्वारा परमानंद प्राप्ति के लिए पूर्ण शक्ति से प्रयत्न करें अर्थात हमारा मन निरंतर भगवान की आराधना में लगा रहे और हम भगवत प्राप्ति जनित परमानंद की अनुभूति के लिए पूर्ण शक्ति से प्रयत्नशील रहें।
🌞👉 वे सब को उत्पन्न करने वाले परमेश्वर मन और इंद्रियों के अधिष्ठाता देवताओं को जो स्वर्ग आदि लोकों में और आकाश में विचरण वाले तथा बड़ा भारी प्रकाश फैलाने वाले हैं ।हमारे मन और बुद्धि से संयुक्त हो करके हमें प्रकाश प्रदान करने के लिए प्रेरणा प्रदान करें, ताकि हम परमेश्वर का साक्षात करने के लिए ध्यान करने में समर्थ हों।हमारे मन ,बुद्धि और इंद्रियों में प्रकाश फैला रहे ।निद्रा, आलस्य और अकर्मण्यता आदि दोष हमारे ध्यान में विघ्न न कर सके।
🌞👉 जिन परब्रह्म परमात्मा में श्रेष्ठ बुद्धि वाले ब्राह्मण आदि अधिकारी मनुष्य अपने मन को लगाते हैं तथा अपनी सब प्रकार की बुद्धि वृत्तियों को भी नियुक्त करते हैं ,जिन्होंने अग्निहोत्र आदि समस्त शुभ कर्मों का विधान किया है ,जो समस्त जगत के विचारों को जगाने वाले और एक अद्वितीय हैं ,उन सब में महान सर्वव्यापी सर्वज्ञ और सब के उत्पादक परम देव परमेश्वर की अवश्य ही हमें भूरी भूरी स्तुति करनी चाहिए।
🌞👉हे मन और बुद्धि! मैं तुम दोनों के स्वामी और समस्त जगत के आदि कारण परब्रह्म परमात्मा को बार-बार नमस्कार करके विधिपूर्वक उनकी शरण में जाकर उन में संलग्न होता हूं।मेरे द्वारा जो उन परमेश्वर की महिमा का वर्णन किया गया है ,वह विद्वान पुरुष की कीर्ति के समान समस्त जगत में व्याप्त हो जाए ।उसे अविनाशी परमात्मा के सभी पुत्र जो दिव्य लोकों में निवास करते हैं , भली-भांति सुनें।
-- क्रमशः
⚜️🚩सत्यमेव जयते 🚩⚜️
⚜️🚩 जय श्री राम 🚩⚜️
⚜️🚩 जय गुरुदेव 🚩⚜️
⚜️🚩जय मां आदिशक्ति 🚩⚜️
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