🕉⚜️गायत्री महामंत्र के साथ प्राणायाम का अभ्यास ⚜️🕉
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🕉 प्राणायाम से बढ़कर पवित्र करने वाला अन्य कोई तप नहीं और गायत्री महामंत्र से बढ़कर अन्य कोई मंत्र नहीं ,प्रार्थना नहीं,अन्य कोई जप नहीं। जब प्राणायाम की क्रिया करते हुए गायत्री महामंत्र को चार भागों में बांट कर जप किया जाता है तो साधक को मंत्र जप से 6 गुना अधिक लाभ मिलता है क्योंकि संपूर्ण आध्यात्मिक विज्ञान प्राण पर निर्भर है ।प्राण का जागृत होना ही अध्यात्म का मूल उद्देश्य है ।आत्मोन्नति प्राण के जागृत होने पर ही निर्भर है , इसलिए गायत्री महामंत्र के जप के साथ जब प्राणायाम किया जाता है तो प्राण की गति सुषुम्ना में प्रविष्ट होकर शीघ्र ही ब्रह्मरंध्र की ओर होने लगती है, सहस्रार चक्र की ओर होने लगती है।
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1. स्वासअंदर भरते समय-
ॐ भूर्भुवःस्वः
2. स्वास अंदर रोककर-
तत्सवितुर्वरेण्यं
3. श्वास बाहर छोड़ते हुए-
भर्गो देवस्य धीमहि
4. बिना स्वास के रहते हुए -
धियो योनः प्रचोदयात् ।
👏 यदि आप अन्य प्राणायाम नहीं भी करते हैं तो गायत्री उपासना या किसी भी प्रकार की उपासना से पूर्व इस एकमात्र नाड़ीशोधन अनुलोम विलोम प्राणायाम को गायत्री महामंत्र के मानसिक जप के साथ अवश्य कीजिए। यह गायत्री महामंत्र सत्य स्वरुप परमात्मा से की गई उत्कृष्ट प्रार्थना है जो आपके प्राण को शीघ्र ही सुषुम्ना मार्ग में प्रविष्ट कर देगी और आपको ब्रह्म तत्व के मार्ग पर तीव्र गति से आगे बढ़ाएगी ।
⚜🚩सत्यमेव जयते 🚩
🔱जय गुरुदेव🔱
⚜️जय मां आदिशक्ति⚜️
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