🕉🌞गायत्री महामंत्र की साधना 🌞🕉
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🌞👉 आप यदि गायत्री महामंत्र का जप करके पूर्ण सिद्धि तक पहुंचना चाहते हैं तो आपको दृढ़ संकल्प के साथ इस मार्ग पर धीरे धीरे ऊर्जा को जागृत करते हुए आगे बढ़ना होगा। मंत्र जप के द्वारा माँ आदिशक्ति जगत जननी से आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने के लिए सतत अभ्यास की आवश्यकता पड़ती है। गायत्री महामंत्र का जप हमारे शरीर में असीम ऊर्जा का प्रादुर्भाव करता है । कोई भी साधक एक साथ अधिक गायत्री महामंत्र के जप से जागृत होने वाली दिव्य ऊर्जा को अधिक सहन नहीं कर सकता क्योंकि इस दिव्य ऊर्जा को सहन करने के लिए किसी भी साधक में धीरे-धीरे ही क्षमता विकसित होती है। यह पूर्णतया विज्ञान सम्मत साधना पद्धति है ,जो फसल को पकाने के लिए किसान द्वारा अपनाई गई पद्धति पर ही आधारित है । यदि आपको मां आदिशक्ति जगत जननी का वरदहस्त प्राप्त करना है तो आपको अपने शरीर रूपी खेत में निरंतर इस ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाना होगा। सतत साधना मार्ग पर चलना होगा। जो भी मां आदिशक्ति का आंचल पकड़ेगा । वह खाली हाथ बिल्कुल नहीं रहेगा। बस आप में साधना करने का साहस होना चाहिए । आलस्य प्रमाद को त्याग कर नियमित रूप से सुबह शाम दोनों समय संध्या काल में साधना करनी चाहिए। मैंने आप सब की सुविधा के लिए गायत्री महामंत्र की साधना को किस प्रकार से धीरे-धीरे आगे बढ़ाएं ।जिससे कि मंत्र जप से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा को आसानी से शरीर में धारण किया जा सके ।इसके लिए माला की संख्या एवं समय के अनुसार चार्ट बना दिया है । आप इस साधना चार्ट से मार्गदर्शन प्राप्त करके अपनी साधना को सतत आगे बढ़ा सकते हैं । समय-समय पर साधना मार्ग पर आगे बढ़ते हुए शारीरिक ,मानसिक एवं आध्यात्मिक बदलाव अनुभव होंगे ।जिसमें आपको मार्गदर्शन लेने की आवश्यकता निश्चित रूप से पड़ेगी । इसलिए जब भी ऊर्जा विशेष कार्य करने लगे तो अनुभवी योग्यजनों से मार्गदर्शन अवश्य प्राप्त करें या मेरे से परामर्श करें।
👏 भगवान श्री नारायण ने देव ऋषि नारद जी को गायत्री महामंत्र का महत्व बताते हुए कहा , "है! नारद जो व्यक्ति संध्या समय में 3-3 हजार गायत्री महामंत्र का जप करता है वह देवताओं के लिए भी सम्मान एवं पूजा का पात्र बन जाता है । गायत्री महामंत्र शब्दों का गुंजन मात्र नहीं बल्कि यह ब्रह्मांड व्यापी चेतन तत्व से संपर्क साधने का प्राणमयी चुंबकीय स्पंदन है । जो भी साधक विधि-विधान से गायत्री महामंत्र की साधना करता है वह कुछ ही समय में इसके प्रभाव को अपने संपूर्ण व्यक्तित्व पर परिलक्षित होता हुआ देख सकता है। इस महामंत्र की साधना के लिए पहली एवं एकमात्र मुख्य शर्त है शुद्ध, सात्विक एवं पवित्र जीवन। यदि इस शर्त पर आप खरे उतरते हैं तो यह मंत्र निश्चित रूप से आप के लिए कामधेनु है ,कल्पवृक्ष है , अद्भुत चमत्कारमयी दिव्य प्राण विद्या है ।
👏 आइए हम इस शक्ति के पथ पर दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें।
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🌞⚜ जो भी साधक पूर्ण विधि विधान से गायत्री महामंत्र की साधना करना चाहते हैं उन्हें सर्वप्रथम पवित्रीकरण ,आचमन , शिखावंदन ,प्राणायाम एवं न्यास का विधि-विधान अपनाना चाहिए । किंतु जो साधक प्रारंभिक अवस्था में है और विधि विधान को झंझट समझते हैं ।उन्हें विधि-विधान अपनाने की आवश्यकता नहीं है। आप सीधे प्राणायाम का अभ्यास करके गायत्री महामंत्र का जप कर सकते हैं । एक बात आप निश्चित रूप से समझ लीजिए गायत्री महामंत्र का कभी भी बुरा प्रभाव नहीं पड़ता ।यदि आप अपने जीवन में मांसाहार एवं दुर्व्यसनों को स्थान नहीं देते। नशे एवं मांस से मुक्त जीवन जीते हैं किंतु यदि आप शराब एवं मांस का प्रयोग करते हैं तो फिर आपको गायत्री महामंत्र का जप करने से पूर्व इन्हें छोड़ना ही होगा वरना आपके लिए अच्छा नहीं होगा। आप को नित नए चमत्कारों से रूबरू होना पड़ेगा। मजबूर होकर आपको इनसे दूर जाना पड़ेगा या तो आप को साधना छोड़नी पड़ेगी या फिर आपको दुर्व्यसन क्योंकि यह मंत्र आपको दूसरा जन्म देकर ब्राह्मणत्व की ओर ले कर जाता है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप जन्म से क्या है? किस जाति ,कुल ,गोत्र ,धर्म में आपका जन्म हुआ है ? बिल्कुल भी महत्वपूर्ण नहीं! सिर्फ आपका वर्तमान आचरण महत्वपूर्ण है , व्यक्तित्व महत्वपूर्ण है। आज से आप बदल रहे हैं ,सुधर रहे हैं, दूसरा जन्म ग्रहण कर रहे हैं ।बस आज से ही आपकी उन्नति शुरु । कल तक आप क्या थे ? यह महत्वपूर्ण नहीं ।आज आप क्या हो ?यह भी इतना महत्वपूर्ण नहीं किंतु कल से आप क्या होना चाहते हो ?यह महत्वपूर्ण है ,बहुत महत्वपूर्ण है और उसे होने के लिए आपको अपने आप से समझौता करना पड़ेगा ।अपने आप को तराशना पड़ेगा क्योंकि जो अनुशासन में नहीं बंध सकता जो अपने व्यक्तित्व की शूद्रताओं को त्याग नहीं सकता। वह कभी भी आत्म उन्नति के मार्ग पर अग्रसर नहीं हो सकता। इसलिए आपको परमात्मा की पूर्ण पवित्र शुद्ध उर्जा को अपने अंदर धारण करने के लिए शूद्रताओं का त्याग करना पड़ेगा तभी आप इस के योग्य पात्र बन सकेंगे ।
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🕉🌞👏 अब मैं वह क्रमबद्ध चार्ट आप सबके समक्ष प्रस्तुत करने जा रहा हूं जिसका अनुसरण करके आप मां आदिशक्ति के अस्तित्व को निश्चित रूप से अपनी आत्मा में धारण कर लेंगे ।
🌞👉 सर्वप्रथम 10 मिनट अनुलोम विलोम नाड़ीशोधन प्राणायाम का अभ्यास नाभि में सूर्य का ध्यान करते हुए। 3 मिनट कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास नाभि में सूर्य का ध्यान करते हुए एवं अंत में 2 मिनट भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास सहस्त्रार चक्र में चंद्रमा के समान शीतल प्रकाश का ध्यान करते हुए। इस अभ्यास को करने के बाद आप नीचे दिए गए चार्ट का अनुसरण करते हुए क्रमबद्ध तरीके से अपनी साधना को उच्च स्तर पर ले जा सकते हैं। इस तरीके से आगे बढ़ते हुए ऊर्जा को सहन करने में आपको समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। प्रारंभिक साधक जो अभी स्थूल पर अधिक टिका है ।मंत्र जप करना शुरू करता है तो उसे प्रारंभ में 10 से 15 मिनट का समय एक माला के जप में लग सकता है किंतु कुछ महीनों के अभ्यास के बाद यह समय घटकर 6 मिनट हो जाएगा और बड़े सहज तरीके से आप 6 मिनट में एक माला का जप कर सकेंगे । बाद में जैसे-जैसे मंत्र जप सूक्ष्म होगा यह समय और कम होता चला जाएगा ।इसी 6 मिनट की अवधि को लक्ष्य करके मंत्र जप का समय चार्ट प्रस्तुत किया जा रहा है। यदि किसी भी साधक को साधना करते हुए मंत्र जप करने में अधिक समय लगता है तो धैर्य के साथ कुछ महीने साधना करें ।अपने आप समय कम हो जाएगा ।
🌞👉 प्रारंभिक साधक प्राणायाम के पश्चात 20 से 30 मिनट या 3 से 5 माला गायत्री मंत्र का जप 2 माह तक करें।
🌞👉 तीसरे महीने 30 से 42 मिनट या 5 से 7 माला जप करें। चौथे महीने तक इसी अभ्यास को जारी रखें।
🌞👉 पांचवे महीने 42 से 54 मिनट या 7 से 9 माला कर दें। छठे महीने भी इसी अभ्यास को जारी रखें ।
🌞👉 सातवें महीने 9 से 11 माला या 54 से 66 मिनट जप का अभ्यास बढ़ा दे। आठवें महीने भी इसी अभ्यास को जारी रखें।
🌞👉 नवे माह 11 से 13 माला या 66 से 78 मिनट अभ्यास को बढ़ा दें। दसवें माह भी इसी अभ्यास को जारी रखें ।
🕉🌞🚩 जब आप नियमित रूप से 11 माला या 1 घंटे से अधिक जप करने लगेंगे तो आपकी माला या जप सिद्ध होने लगेगा। आपको विभिन्न प्रकार के अनुभव होने लगेंगे।
🌞👉 11 वे माह 13से 15 माला या 78 से 90 मिनट अभ्यास को बढ़ा दें।
👉 अभ्यास यहां तक आने के बाद माला में एवं जप में लगने वाला समय और कम हो जाएगा एवं एक माला को करने में 5 मिनट का समय ही लगेगा । किंतु संपूर्ण अभ्यास का समय कम नहीं कर के हम सिर्फ आगे बढ़ने वाले अभ्यास का ही समय कम कर रहे हैं क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति की गति एक जैसी नहीं हो सकती।
🌞👉 बाहरवें महीने 15 से 17 माला या 90 से 100 मिनट अभ्यास को बढ़ा दे। 13 वें महीने भी इसी अभ्यास को जारी रखें।
🌞👉 14 वें महीने 17 से 19 माला या 100 मिनट से 110 मिनट अभ्यास को बढ़ा दे। 15 वें महीने भी इसी अभ्यास को जारी रखें ।
👉 यहां तक पहुंचने के पश्चात आप का मंत्र जप अत्यंत सूक्ष्म हो जाएगा। ध्यान की गहराई भी अत्यधिक बढ़ जाएगी। मंत्र जप का समय और अधिक कम हो जाएगा। किंतु संपूर्ण अभ्यास का समय कम नहीं करेंगे मात्र आगे के अभ्यास में समय घटाएंगे।
🌞👉 16 वें माह 19 से 21 माला या 110 से 118 मिनट जप एवं ध्यान को बढ़ा दे।
🌞👉 सत्रहवें माह 21 से 23 माला या 118 से 126 मिनट अभ्यास को बढ़ा दें।
🌞👉 अठारहवें माह ते 23 से 25 माला या 126 से 134 मिनट अभ्यास को बढ़ा दें।
🌞👉 उन्नीसवें माह 25 से 27 माला या 134 से 140मिनट अभ्यास को बढ़ा दें।
🌞👉 बीसवें माह 27 से 29 माला या 140 से 146 मिनट अभ्यास को बढ़ा दे।
🌞👉 इक्कीसवें माह 29से 31 माला या 146 से 150मिनट अभ्यास को बढ़ा दे।
👉 इस तरीके से आगे बढ़ते हुए मां आदिशक्ति के दिव्य स्वरूप को आप सरल तरीके से आत्मसात कर पाएंगे और उर्जा के उत्थान से साधक भाइयों बहनों को किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं होगी।
👏 जैसे-जैसे आप का मंत्र जप गहरा एवं सूक्ष्म होता जाएगा आपका मंत्र जप में लगने वाला समय और अधिक कम होगा। जो भी साधक ढाई घंटे तक अपनी साधना को बढ़ा देगा ।निश्चित मान कर चलिए आप उर्जा के दिव्य पुंज बन जाएंगे । जिन साधक भाई बहनों के पास सुबह शाम समय हो वे दोनों समय संध्या समय पर साधना करें और माँ आदिशक्ति के दिव्य अनुदानों का आत्मसाक्षात्कार करें।
⚜️🚩 सत्यमेव जयते 🚩⚜️
⚜️🚩जय गुरुदेव🚩⚜️
⚜️🚩जय माँ आदिशक्ति 🚩⚜️
Kindly mention your contact number or you may contact on 8440999989.
ReplyDeleteAspecting little bit time from your valuable time.
Jai mata Gaayatri
ReplyDeleteGàayatri mata hi Bramhvidya hai .jo hame bramhgyan pradan karti hai.jai mata di
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