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Monday, July 8, 2019

संपूर्ण योग विधियों का लक्ष्य क्या है?

🕉संपूर्ण योग विधियों का लक्ष्य क्या है? इस लक्ष्य को कैसे प्राप्त करें ?
                                  - दीपक कुमार
                    ⚜️🚩⚜️
🔥दीपक जी संसार में जितनी भी ध्यान की विधियां हैं , जितनी भी योग की विधियां हैं ,सबका एक ही लक्ष्य है -" चित्त को क्रिया शून्य बनाना एवं शरीर को अधिक से अधिक ऊर्जावान एवं क्रियाशील बनाना।" वर्तमान में हम जो जीवन जी रहे हैं ,उसमें हम शरीर को तो कम से कम काम में लेना चाहते हैं, आराम तलब बनाकर रखना चाहते हैं ,जबकि हमारा मन हमेशा ख्याली पुलाव पकाने में लगा रहता है ।हमेशा कुछ न कुछ ख्याली पुलाव पकाता  ही रहता है। समस्त प्रकार का आध्यात्मिक क्रियाकलाप इसी एक बात पर खत्म हो जाता है कि मन को एकाग्र कर लिया जाए ।चाहे हिंदू धर्म हो, चाहे बौद्ध धर्म ,चाहे जैन धर्म, चाहे इसाई धर्म ,चाहे मुस्लिम धर्म यदि आत्मा की उन्नति करना चाहते हैं तो मन को एकाग्र करना ही पड़ेगा। अधिकांश धर्मों में मन को एकाग्र करने पर ही बल दिया गया है और उसी साधना पद्धति की ओर बढ़ाया गया है । जिन धर्मों में ध्यान की पद्धति नहीं हैं, वे आत्म उन्नति का मार्ग कभी भी नहीं दिखा सकते। आत्मा की उन्नति सिर्फ और सिर्फ ध्यान से होती है और ध्यान मन की एकाग्रता से जन्म लेता है। यदि योग की वास्तविक परिभाषा ज्ञानी ऋषि-मुनियों की भाषा में पूछी जाए तो वह यही है कि-" चित्त वृत्तियों का निरोध हो जाना ही योग है।"
आपने राजयोग के बारे में पूछा है निश्चित ही राजयोग के माध्यम से कोई भी साधक अपने मन को साध सकता है किंतु मैंने साधनात्मक अनुभव के आधार पर बहुत ही सरल साधना पद्धति का सामंजस्य तैयार किया है ,जिसमें हठयोग, लय योग, राज योग एवं मंत्र योग सभी का सामंजस्य किया गया है । जिसे आप बड़ी सहजता से कर सकते हैं ।किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति हो ,कोई समस्या नहीं है । बिल्कुल सहजता से साधना की जा सकती है और यदि इस पद्धति से कोई साधक साधना करता है तो निश्चित रुप से कुछ ही महीनों में वह अद्भुत बदलाव अपने व्यक्तित्व में निश्चित रूप से देख पाता है । मात्र 3 माह के अभ्यास से प्रत्येक साधक अपने आप को रूपांतरित होता हुआ स्पष्ट रूप से महसूस करेगा । इसलिए बेहद सरल एवं सहज इस विधि का अनुसरण कीजिए।आप पूर्णतया मन को एकाग्र करके योग की स्थिति को अति शीघ्र प्राप्त कर लेंगे। यदि आप कुंडलिनी शक्ति को जागृत करना चाहते हैं तो वह भी इस साधना से सहजता  से जागृत हो जाएगी।
                         🔥
🔥सर्वप्रथम आप प्रातः काल जल्दी उठ जाइए ।नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाइए एवं  अपने घर के एक शांत कमरे में आसन बिछाकर  सिद्धासन ,पद्मासन, वज्रासन या सुखासन में से जिस किसी आसन में भी आप बैठ सकें ,बैठ जाइए। यदि घर में निश्चित साधना स्थल या पूजा स्थल है तो आप वहां पर बैठकर साधना कर सकते हैं।
अब आपको 10 मिनट अनुलोम विलोम प्राणायाम अंतः कुंभक एवं बाह्य कुंभक के साथ करना है अंतः कुंभक एवं बाह्य कुंभक करते हुए नाभि में उगते हुए सूर्य का ध्यान करना है।
अनुलोम विलोम प्राणायाम के बाद लगभग 3 मिनट कपालभाती प्राणायाम करें। तत्पश्चात 2 मिनट भ्रामरी प्राणायाम करें। भ्रामरी प्राणायाम करने के बाद हाथों को ऊपर उठाएं एवं दोनों हथेलियों को आपस में रगड़ें । हथेलियां गर्म होने पर आंखों के ऊपर रखें ।इसके पश्चात आंखें खोलें और धीरे-धीरे प्रकाश आने दे।
प्राणायाम की क्रिया पूर्ण होने के बाद ध्यान मुद्रा में बैठ जाएं एवं भ्रकुटी अर्थात आज्ञा चक्र पर उगते हुए सूर्य का ध्यान करते हुए गायत्री महामंत्र का मौन मानसिक जप करते हुए लगभग 30 मिनट तक आज्ञा चक्र पर ध्यान करें।
इस साधारण से अभ्यास में योग की संपूर्ण विधियों का समावेश है, जिससे मन को पूर्णतया एकाग्र किया जाना पूर्णतया संभव है ।आप कुछ ही महीनों के अभ्यास से स्वयं अनुभव कर लेंगे।
                                 -- योगाचार्य रामेश्वर मानव
          ⚜️🚩 सत्यमेव जयते 🚩⚜️
       🔥 मांँ आदि शक्ति कुंडलिनी योग 🔥
                  🚩 जय गुरुदेव 🚩
         ⚜️🚩 जय मां आदिशक्ति 🚩⚜️

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