🕉🌞विज्ञान भैरव तंत्र 🌞🕉
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⚜️धारणा 4 ⚜️
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👉 भगवान शिव माता पार्वती को उस भैरव स्वरुप को प्राप्त करने का धारणात्मक विज्ञान समझाते हुए कहते है-- कुंभक , रेचक एवं पूरक के द्वारा अभ्यास करके जब प्राण एवं अपान रूप शक्ति आदर पूर्वक निरंतर अभ्यास का परिचालन करने से शांत हो जाती है तो मध्य दशा का विकास हो जाता है। कुंभक की प्रशांत अवस्था का उदय होने से सभी भेद विगलित हो जाते हैं , समाप्त हो जाते हैं और शक्ति अपने शांत स्वरूप में विलीन हो जाती है । तब नाम रूप से अतीत प्रकाश मात्र अवस्था का उदय होता है और साधक का परम शांत स्वभाव अभिव्यक्त हो जाता है अर्थात साधक भैरव स्वरुप को प्राप्त कर लेता है।
🌞 साधक के दो शब्द-- भाइयों बहनों ! यहां पर भगवान शिव ने माता पार्वती को उस भैरव स्वरुप को प्राप्त करने के विज्ञान को समझाते हुए कहा है कि जब पूरक ,रेचक ,कुंभक आदि प्रक्रियाओं का अनुसरण करते हुए साधक शांत अवस्था को अर्थात केवल कुंभक अवस्था को प्राप्त कर लेता है तो उसका भैरव स्वरूप प्रकट हो जाता है ।केवल कुंभक अवस्था को मध्य दशा नाम से भी संबोधित किया जा सकता है क्योंकि प्राण का सुषुम्ना मार्ग पर प्रवाहित हो जाना, यही प्राणायाम का मूल उद्देश्य है और जब प्राण सुषुम्ना मार्ग पर प्रवाहित होने लगता है तो साधक ध्यान की अनंत गहराई में डूबने में समर्थ हो जाता है ।इस स्थिति का वर्णन पूर्व धारणाओं में भी किया गया है ।यदि देखा जाए तो इस धारणा के अंतर्गत भगवान शिव के द्वारा किसी नवीन धारणात्मक विज्ञान को समझाया नहीं गया है बल्कि पूर्व में समझायी गई धारणा 1 एवं 2 का अनुसरण करते हुए या योगशास्त्र द्वारा बताए गए अनुलोम विलोम नाड़ी शोधन प्राणायाम का अभ्यास करते हुए जो कोई भी साधक मध्यदशा अर्थात सुषुम्ना मार्ग में प्राण का प्रवाह करने में समर्थ हो जाएगा । वह उस भय को नष्ट करने वाले भैरव के स्वरूप को जानने में समर्थ हो जाएगा ।वह उस बौद्ध भैरव के स्वरुप को प्राप्त कर लेगा , यही सत्य व्यक्त किया है।
⚜️🚩 सत्यमेव जयते 🚩⚜️
🚩 जय गुरुदेव 🚩
⚜️🚩जय मां आदिशक्ति 🚩⚜️
Guruji pranam
ReplyDeletePlese important neyam va vedhi pata chale to keya jayega lakin guru chahiye