🕉🌞 मन पर विजय 🌞🕉
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🌞 भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है-" हैअर्जुन! जिसने मन को जीत लिया उसने संपूर्ण संसार को जीत लिया।" हमारा यह मन ही तो है जो हमें अंधकार मय गर्त में गिराता है। जितने भी बुरे काम हैं उन्हें हम करना नहीं चाहते किंतु फिर भी करते हैं क्यों? क्योंकि हमारा मन करवाता है! आत्मा मना करती है, दुत्कारती है ! किंतु फिर भी मन हमें घसीट कर वहां ले जाता है, जहां हमें जाना ही नहीं चाहिए था। हम ना तो पागल हैं न मूर्ख !बल्कि हम संपूर्ण ज्ञान विज्ञान से भरे हुए हैं। सब कुछ जानते हैं कि हम जो कर रहे हैं ,गलत है।इसका आज नहीं तो कल बुरा परिणाम निश्चित ही आएगा । किंतु फिर भी हम ऐसे काम करते हैं, जिनके लिए बाद में हमें पछताना पड़ता है ।
हम पशु पक्षी नहीं है ।हम परमात्मा की सर्वश्रेष्ठ कृति मनुष्य हैं ।तर्क वितर्क एवं बुद्धि का अथाह सागर भरा हुआ है हमारे मस्तिष्क में ।किंतु फिर भी हम गलत राह पर जाते हैं! क्यों? क्योंकि हमारा मन हमारे नियंत्रण में नहीं है। अगर मन पर हमारा नियंत्रण हो जाए तो फिर हम सच्चे इंसान ही नहीं ,इसी जीवन में देवत्व को प्राप्त कर लेंगे।
हम कल क्या थे? यह महत्वपूर्ण नहीं!हम आज क्या हैं? यह महत्वपूर्ण है ! हम कल क्या होना चाहते हैं? यह सबसे अधिक महत्वपूर्ण है !! क्योंकि कल जो बीत चुका है ,अब हमारे हाथ में नहीं ।कल के अच्छे बुरे कर्म अब हमारा प्रारब्ध बन चुके हैं। उनका तो समयानुसार हमें अच्छा या बुरा फल भोगना ही पड़ेगा, लेकिन वर्तमान हमारे हाथ में है।हम आज जो करेंगे,वह कल हमारा प्रारब्ध बन जाएगा। हमारा आज का कर्म हमारे आने वाले कल का निर्माण करेगा,इसलिए आज हमें सोचना है कि हमें हमारे जीवन पथ को किस राह पर ले जाना है और एक बार सोच कर, यह भी निश्चित करना है कि इसके लिए मुझे अपने व्यक्तित्व एवं कर्मों में क्या-क्या बदलाव करने हैं? जब सबकुछ निश्चित हो जाए तो उस राह पर ओंकार स्वरूपी सविता परमात्मा को स्मरण करके आगे बढ़ने का संकल्प लें और प्रार्थना करें-
🌞"है परमपिता परमात्मा !मुझे अपने न्याय पूर्ण सत मार्ग पर चलने की शक्ति एवं सामर्थ्य दें। मैं अपने मन पर पूर्ण विजय पा सकूं, ताकि आप के रूप में मेरे हृदय में विद्यमान आत्मतत्व की आवाज सुनकर जीवन पथ पर आगे बढ़ सकूं।"
अब यदि आप अपने मन पर पूर्ण विजय पाना चाहते हैं तो एक छोटा सा अभ्यास आपको करना पड़ेगा। सिर्फ 21 दिन आप इस प्रयोग को नियमित करके देखिए। आपका मन कितना भी चंचल हो ,एकाग्र होने लग जाएगा. धीरे-धीरे आप अपने मन पर पूर्ण विजय प्राप्त कर लेंगे।
👉 विद्यार्थियों को इस प्रयोग से अत्यधिक लाभ होगा एवं आमजन परमात्मा की ओर बढ़ चलेगा।
🌞👉 प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठ जाइए। उठते ही आपको चाय नहीं पीनी है।
👉 नित्यकर्मों से निवृत हो जाइए।
👉 अब अपने घर पर ही जहां आप आराम से 30 मिनट बिना व्यवधान के बैठ सकें।ऐसे स्थान पर आसन बिछाकर सिद्धासन ,पद्मासन या सुखासन में से जिस में भी आप बैठ सकें, बैठ जाइए।
👉 जिस महापुरुष को भी आप आदर्श मानते हों उन्हें स्मरण करके आशीर्वाद लीजिए।
👉 ओंकार स्वरुप परमात्मा का ध्यान कीजिए।
👉 अब दाहिने हाथ के अंगूठे से दांया नासा छिद्र बंद करें एवं बाएं नाक से धीरे-धीरे गहरी लंबी सांस खींचे।
👉 सांस को अंदर ही रोक कर रखिए एवं भ्रकुटी( भौहों के बीच ) उगते हुए सूर्य या सफेद रंग की प्रकाश ज्योति का ध्यान कीजिए।
👉 जब सांस छोड़ने की आवश्यकता महसूस हो तो बांया नासा छिद्र मध्यमा एवं अनामिका अंगुली से बंद कर लीजिए एवं दाएं नाक से धीरे-धीरे श्वास बाहर छोड़ दीजिए।ध्यान भ्रकुटी पर ही लगाए रखिए।
👉 कुछ देर बिना सांस के रहे. ध्यान भ्रकुटी पर ही रखें।
👉 अब पुनः जिस दाहिने नाक से श्वास छोड़ा था, उसी नाक से धीरे-धीरे सांस को अंदर भरें। ध्यान भ्रकुटी पर ही सविता या आत्मज्योति पर।
👉 जब तक सांस रोक सके रोक कर रखें।
👉 अब दाहिने नाक को बंद करें एवं बाएं नाक से धीरे-धीरे सांस छोड़ें।
🌞 इस प्रकार इस क्रिया का अभ्यास आप को कम से कम 10 मिनट तक करना है।
👉 अब आप ध्यान मुद्रा अर्थात अंगूठा एवं तर्जनी अंगुली को मिलाकर बैठ जाइए।
👉 आंखें बंद करके उगते हुए सूर्य (सविता) या सफेद रंग की आत्म ज्योति का भ्रकुटी पर ध्यान कीजिए।
👉 मौन मानसिक रुप से गायत्री महामंत्र या ओंकार का जप करते रहिए।
👉 लगभग 20 मिनट ध्यान एवं मंत्र जाप कीजिए।
🌞 जिन भाइयों एवं माताओं, बहनों ने गुरु दीक्षा ले रखी है।वे गायत्री मंत्र या ओमकार के स्थान पर अपने गुरु मंत्र का जप कर सकते हैं।
👉 जिन भाइयों को मंत्र जप से डर लगता है अर्थात मांसाहारी है किंतु मन को साधना चाहते हैं वे प्रारंभिक प्राणायाम की क्रिया को ही 15 मिनट तक करें, बाद में शांत होकर ध्यान मुद्रा में बैठ जाएं।ध्यान भ्रकुटी पर ही रखें एवं लंबी गहरी श्वास लेते रहें या आती-जाती श्वास को देखते रहें श्वास आ रही है श्वास जा रही है । बस देखते रहें ,देखते रहे ।सांस जितनी लंबी एवं गहरी होगी, मन पर नियंत्रण उतना ही जल्दी बढ़ता जाएगा। बाद में यह श्वास अपने आप छोटी होती चली जाएगी । यदि मांसाहारी व्यक्ति मंत्र जप करना चाहता है तो मां दुर्गा के नवार्ण मंत्र का जप करें। इस मंत्र का जप करते हुए मांसाहारी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि यह मंत्र तंत्र पद्धति पर आधारित है।
🙏🏻👏 कुछ ही समय में आप अद्भुत चमत्कारिक प्रभाव देखेंगे।
-- सनातनी हिंदू योगाचार्य रामेश्वर मानव
( मेरी संपूर्ण पहचान)
⚜️🚩 सत्यमेव जयते 🚩⚜️
⚜️🚩 जय श्री राम 🚩⚜️
⚜️🚩 जय गुरुदेव 🚩⚜️
⚜️ 🚩जय मां आदिशक्ति🚩 ⚜️
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