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Tuesday, April 22, 2025

शांति की अंतिम राह

🕉️🚩 धर्म एवं अधर्म की जंग सृष्टि के उद्भव काल से चलती आई है, लेकिन प्राचीन समय में राक्षस कहलाने वाले दुर्गुणों के प्रतिक हिरण्याक्ष, रावण एवं जरासंध आदि भी अधिकांशतया निश्चित धार्मिक नियमों का पालन करते थे, किंतु वर्तमान कलयुगी राक्षस किसी धार्मिक नियम का पालन नहीं करते। इनके लिए मानवता की हत्या ही धर्म है, पवित्र एवं पुण्य कार्य है,जन्नत में पहुंचने का परमानेंट टिकट है। इन राक्षसों के अंदर इस प्रकार की राक्षसी प्रवृत्ति को कूट-कूट कर भरने वाला ग्रंथ अपने आप में धर्म ग्रंथ नहीं अधर्म ग्रंथ  है। समस्त समस्याओं की जड़ ,यही धार्मिक ग्रंथ "कुरान" है और जब तक कुरान एवं कुरान के  सिद्धांत इस दुनिया में कायम रहेंगे , सतयुग का आगमन कभी हो ही नहीं सकता । धर्म की स्थापना कभी हो ही नहीं सकती। 
🚩👏 यदि इस संसार में धर्म की स्थापना चाहिए तो अधर्म का अंत करना ही होगा और अधर्म का अंत किसी व्यक्ति के अंत से नहीं ,उस विचारधारा का जड़- मूल से अंत करना होगा, जो समस्त विश्व में अशांति का कारण है, अधर्म का पर्याय है। इसे अपने आप में विश्व व्यापी आंदोलन बनाना ही पड़ेगा और इस आंदोलन का नेतृत्व प्रत्येक मानवीय मूल्यों के हितेषी धार्मिक व्यक्ति को अपने स्तर पर ही करना होगा ।
👏 हमारे लिए चींटी को मारना  पाप है, उनके लिए काफिरों की हत्या सबसे बड़ा पुण्य, जन्नत का परमानेंट टिकट! जिनके मस्तिष्क में हत्या करने को धार्मिक कार्य के रूप में स्थापित कर दिया गया हो; वे  राक्षस आतंकी संसार के लिए अशांति  के अलावा कुछ और क्या दे सकते हैं? और इन राक्षसों को भजन या मंत्र सुनाने  से काम नहीं चलेगा ।  वेद  उक्ति है-" शठं शाठ्यम् समाचरेत् अर्थात दुष्ट के साथ दुष्ठता ( कठोरता) का ही प्रयोग करना चाहिए। कहते हैं लातों के भूत बातों से नहीं मानते। इनको भाषा सिर्फ लातों की समझ में आएगी। तुम कितने ही पैसे कमा लो, कितना ही धन अपने घर में भर लो लेकिन तुम हमेशा असुरक्षित हो ! तुम डॉक्टर ,इंजीनियर ,आईएएस, आईपीएस बन जाओ, तुम हमेशा असुरक्षित हो ! एक पंचर बनाने वाला उस दिन का इंतजार कर रहा है, जब वह तुमसे तुम्हारा सब कुछ छीन लेगा । तुम्हारी सारी डिग्रियां एवं तुम्हारा सारा वैभव तुम्हारी रक्षा नहीं कर सकेगा। तुम्हें एहसास ही नहीं है, जिसे तुम दिन - हीन समझ रहे हो, वह तुम्हारी कोठी पर ,तुम्हारे बंगले पर, तुम्हारी सुंदर बीबी एवं लड़की पर आंख जमाए बैठा है। वह रोड पर बैठकर तपस्या कर रहा है । वह तप रहा है ,उस वक्त का इंतजार कर रहा है, जब उसे उसका लक्ष्य हासिल करने का अबसर प्राप्त होगा और वह उस दिन चुकेगा नहीं! क्योंकि चुकना एवं छोड़ना उसकी फितरत में नहीं ! वह अपनी मंजिल प्राप्त कर लेगा ,अपने लक्ष्य को साध लेगा । तुम चूक रहे हो, वह कभी नहीं चुकेगा। तुम डर रहे हो ,वह कभी नहीं डरेगा ।  यदि राक्षसों को बातों से समझाया जा  सकता तो क्या  भगवान राम को भी हथियार उठाने पड़ते? भगवान परशुराम, भगवान श्री कृष्ण,  पवन पुत्र हनुमान , समाधिस्थ महायोगी भगवान शिव, मां आदिशक्ति काली, मां दुर्गा, ब्राह्मणी, रुद्राणी ,इंद्राणी एवं  वैष्णवी को हथियार उठाने पड़ते? जब समस्याओं का समाधान शब्दों से नहीं होता, तब हथियार ही समाधान करते हैं,और जो समाज हथियार उठाने से डरता है, उसका अंत निश्चित है। उनके लिए शांति तब तक है जब तक परिस्थितियां अनुकूल नहीं ,परिस्थितियों की अनुकूलता प्राप्त होते ही फिर शांति के लिए कोई स्थान नहीं! 
👏 आओ शांति की राह चलें, क्योंकि जहां पर शांति के सब मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं ,वहां पर यही एक मार्ग शेष रह जाता है--शस्त्र! 
  🚩 जय श्री राम 🚩

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