🕉️🚩 भाइयों बहनों जय मां आदिशक्ति! क्या कभी गंभीरता से आपने धर्म के विषय में चिंतन मनन किया है? शायद किया भी हो किंतु ऐसे आत्मजनों की संख्या अत्यंत न्यून होगी । धर्म का अर्थ ढोंग, पाखंड ,आडंबर में लिपटे रहना नहीं है, बल्कि धर्म का वास्तविक अर्थ है -"मानव को वास्तविक अर्थ में मानव बना करके उसमें दिव्य गुणों का संवर्धन करना"। वर्तमान शिक्षा प्रणाली से आप डॉक्टर इंजीनियर आर. ए .एस., आइ. ए.एस तो बना सकते हैं किंतु सच्चा इंसान नहीं बना सकते। यदि किसी को सच्चा इंसान बनाना है तो धर्म की शरण में जाना होगा और आज भारतवर्ष में यदि किसी मूल ज्ञान की कमी है तो वह सच्चे धर्म के ज्ञान की ही है। धर्म हीन भारतवर्ष अपने नैतिक मूल्यों से नीचे गिर गया है ।इसी वजह से भ्रष्टाचार एवं रिश्वत खोरी संपूर्ण भारतवर्ष में व्याप्त है। वर्तमान में अधिकांश व्यक्ति बेहद स्वार्थी एवं खुदगर्ज है, सिर्फ खुदगर्ज। यह धर्म के ज्ञान के अभाव की वजह से है।
सच्चा धर्म खुदगर्जी नहीं परोपकार सिखाता है।
खुद के लिए जीना नहीं बल्कि प्राणी मात्र के लिए जीना सिखाता है।
और जहां पर खुदगर्जी हटी वहीं से त्याग का भाव जागृत होता है,
और धर्म की शुरुआत यहीं से होती है।
वर्तमान में हिंदू धर्म विकृत हो चुका है किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि सनातन धर्म की विचारधारा हमेशा से विकृत रही है।
सनातन धर्म की विचारधारा हमेशा से प्राणी मात्र के लिए कल्याणकारी थी, है ,और रहेगी। जिस दिन हम फिर से सनातन के वास्तविक मूल्यों पर चलने लगेंगे यह संपूर्ण विश्व फिर से मानव मात्र ही नहीं ,प्राणी मात्र के लिए कल्याणकारी एवं हितकारी बन जाएगा
🚩🔥 धर्म की जय हो !
अधर्म का नाश हो !
प्राणियों में सद्भावना हो!
विश्व का कल्याण हो!
⚜️🚩 जय गुरुदेव 🚩⚜️
⚜️🚩 जय मांँ आदिशक्ति 🚩⚜️
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