Wikipedia

Search results

Monday, May 2, 2022

भगवान परशुराम के जीवन से कुछ सीखें।

🕉️🚩🚩🚩⚜️🚩🚩🚩🕉️
                       ⚜️🚩⚜️
🚩  भक्ति- शक्ति, साहस -सामर्थ्य, त्याग- बलिदान एवं दृढ़ संकल्प के महानतम प्रतिनिधि भगवान परशुराम जयंती एवं अक्षय तृतीया महा शुभ पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं; बहुत-बहुत मंगल कामनाएं। 
🚩 आत्म जनों! हमने हमारे दिव्य व्यक्तित्व धारी साहसी एवं संकल्पी महापुरुषों को भगवान तो बना दिया ,उन्हें मंदिरों में बिठा करके उनकी पूजा तो करने लगे किंतु उनके जीवन चरित्र से शिक्षा ग्रहण करना  भूल गए ! दिखाई देता है हम ज्ञान से अज्ञान की ओर गति कर रहे हैं। भगवान परशुराम सत्य ,धर्म ,न्याय एवं मानवीय मूल्यों के  जीवंत उदाहरण थे और जब भगवान परशुराम किशोरावस्था में भगवान शिव से उन के सानिध्य में रहकर के गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे ,उस समय भगवान शिव ने अपने शिष्यों की परीक्षा लेने के लिए एक ऐसा अशोभनीय अनैतिक कार्य  किया जो एक गुरु को नहीं करना चाहिए था। उसे देखकर अन्य सभी शिष्य  संकोच से दब गए और चुप रहे किंतु भगवान परशुराम से यह सब देखा न गया और भगवान परशुराम ने भगवान शिव को पहले तो समझाया किंतु बात समझाने से नहीं बन पायी  तो अपने गुरु पर ही फरसे से प्रहार कर दिया । चोट बड़ी गहरी थी भगवान शिव का सिर फट गया था ,पर उन्होंने इसका बुरा न माना। वरन् संतोष व्यक्त करते हुए गुरुकुल के समस्त शिष्यों को संबोधित करते हुए कहा -"अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करना प्रत्येक धर्मशील व्यक्ति का मानवोचित कर्तव्य है । फिर अन्याय करने वाला चाहे कितनी ही ऊँची स्थिति का क्यों न खड़ा हो। संसार से अधर्म  इसी प्रकार मिटाया जा सकता है। यदि उसे सहन करते रहा जाएगा तो इससे अनीति बढ़ेगी और इस सुंदर संसार में अशांति उत्पन्न हो जाएगी। परशुराम ने धर्म रक्षा के लिए जो साहस प्रदर्शित किया उससे मैं बहुत प्रसन्न हूंँ।" ऐसे सत्यनिष्ठ ज्ञान देने वाले गुरु थे भगवान शिव और ऐसे सत्य निष्ठ शिष्य थे, भगवान परशुराम किंतु आज हमने इन महान व्यक्तित्वों को मंदिरों में तो बिठा दिया है किंतु इनके जीवन चरित्र से कुछ भी सीखना एवं ग्रहण करना  बिलकुल छोड़ दिया है क्योंकि ये तो अवतार थे और हम इंसान हैं। बस यही एक विडंबना सत्य सनातन धर्म को अज्ञान के अंधकार की ओर ले कर चली जा रही है। हमको स्वयं यह पता ही नहीं है कि भगवान शिव ने स्वयं कितने ग्रंथ लिखे हैं और उनमें उन्होंने कितना सत्य निष्ठ तत्वज्ञान दिया है?  एक -एक विषय को भगवान शिव ने पूर्ण तार्किक दृष्टिकोण से समझाया है किंतु हम ने उन्हीं भगवान शिव को गंजेड़ी ,भंगेड़ी ,नशेड़ी बना करके समाज के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है, धर्म के नाम पर पाखंड का पुलिंदा इन पुराणों की कथाएं सुना सुना कर । धर्म की रक्षा करने के लिए कोई राम आएगा ,कोई परशुराम आएगा, कोई कृष्ण आएगा, कोई कल्की आएगा किंतु हमको यह पता ही नहीं है कि राम,  परशुराम हमारे अंतस्थ में ही विराजमान हैं। उन्हें सत्य निष्ठ मार्ग पर आगे बढ़ कर के जप, तप,ध्यान करके प्रकट किया जाता है। हम उस विज्ञान से दूर हो गए हैं जिस विज्ञान का अनुसरण करके नर को नारायण बनाया जाता था । जब आज के गुरु ही भगवान शिव के समान सत्य निष्ठ ज्ञान दाता नहीं रहे तो शिष्य भगवान परशुराम के जैसे कैसे हो सकते हैं ? और जब गुरु शिष्य की यह पवित्र परंपरा ही नष्ट -भ्रष्ट हो गई है तो धर्म की रक्षा कैसे हो सकेगी? भारतवर्ष में सच्चे योद्धाओं का जन्म कैसे हो सकेगा ? हमने धर्म को सिर्फ व्यवसाय का रूप दे दिया है। महान व्यक्तित्वों को अवतार बना दिया और जन सामान्य को भिकारी एवं नचय्या। वरना सत्य सनातन धर्म वास्तविक अर्थ में नर को नारायण बनाने की पूर्ण सामर्थ्य रखता है। कल भी रखता था आज भी रखता है और हमेशा रखेगा ।बस हम अपने स्वार्थ से बाहर निकल कर के धर्म को सही राह पर आगे ले जाने का संकल्प धारण करें । हमें अपनो ने लूटा गैरों में कहां दम था? यह  कथन हम पर पूर्णतया लागू होता है। 👏 आओ इस पावन  अवसर पर हम संकल्प लें कि हमारे अवतारी महापुरुषों के जीवन चरित्र से धर्म की रक्षा के लिए हम वह ज्ञान ग्रहण करेंगे जो उन्होंने वास्तविक अर्थ में अपने जीवन में उतारकर अधर्म का अंत एवं धर्म की रक्षा की थी। यदि हम हमारे दिव्य अवतारी महापुरुषों के जीवन से कुछ शिक्षा ग्रहण करके अपने जीवन में उतार सके तो वास्तविक अर्थ में यह उनके प्रति की गई हमारे द्वारा सर्वश्रेष्ठ पूजा, उपासना, साधना एवं तपस्या होगी और निश्चित रूप से हम भी अवतार बनने की स्थिति में पहुंच सकेंगे। कल को किसी न किसी मंदिर में हमारी भी मूर्ति की स्थापना हो जाएगी और हमारी भी आरती उतारी जाएगी किंतु हमारे द्वारा दिए गए वास्तविक सत्य ज्ञान को उसी तरह से भुला दिया जाएगा । जिस प्रकार से भगवान राम, भगवान शिव ,भगवान परशुराम एवं भगवान कृष्ण के सिद्धांतों को भुला दिया गया है। धर्म की रक्षा तभी हो सकती है जब अधर्मी अन्यायी चाहे कोई भी हो चाहे गुरु हो या सगा संबंधी किसी को कभी भी बख्शा नहीं जाना चाहिए क्योंकि अधर्मी का साथ देने पर अधर्म बढ़ता है और यहीं से मानवता पतन के गर्त की ओर अग्रसर होती है।
👏 इसिलिए भगवान परशुराम की जयंती के इस शुभ अवसर पर आओ हम संकल्प लें कि उनके जीवन से हम उन महत्वपूर्ण गुणों को ग्रहण करने का भरसक प्रयास करेंगे ,जिन्हें धारण करके उन्होंने अधर्म के विरुद्ध लोहा लिया था ।यही भगवान परशुराम के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धा एवं पूजा प्रार्थना होगी।
👏 एक बार फिर से आप आत्म जनों को अक्षय तृतीया पावन पर्व एवं भगवान परशुराम जयंती पर्व की ढेरों शुभकामनाएं।
      🚩 हर हर महादेव 🚩
    ⚜️🚩 जय गुरुदेव 🚩⚜️
   ⚜️🚩 जय मां आदिशक्ति 🚩⚜️
   ⚜️🚩 जय परशुराम 🚩⚜️

No comments:

Post a Comment

मंदिर की पुकार

🕉️🚩🚩 मंदिर की पुकार🚩🚩🕉️ 🕉️ रुको ! रुको ! अरे! कुछ देर रुको!  कहां देखते हो ? मैं कोई और नहीं!   मैं वही हूं ,जिसके दरवाजे पर तुम खड़े...