🕉🌞श्वेताश्वरोपनिषद 🌞🕉
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👉 प्रकृति एवं पुरुष के वास्तविक स्वरूप को समझाने के लिए आगे वे ऋषि कहते हैं--
🌞👉 हम एक ऐसी नदी को देख रहे हैं ,जिसमें पांच ज्ञानेंद्रियां ही पांच स्रोत हैं ।संसार का ज्ञान हमें पांच ज्ञानेंद्रियां के द्वारा ही प्राप्त होता है ।इन्हीं में से होकर संसार का प्रवाह बहता है । इसीलिए इंद्रियों को यहां स्रोत कहा गया है। ये इंद्रियां पंच सूक्ष्म भूतों अर्थात तन्मात्राओं से उत्पन्न हुई है ।इसीलिए इस नदी के पांच उद्गम स्थान माने गए हैं ।इस नदी का प्रवाह बड़ा ही भयंकर है ।इसमें गिर जाने से बार-बार जन्म मृत्यु का कष्ट उठाना पड़ता है। संसार की चाल बड़ी टेढ़ी है ,कपट से भरी हुई है ।इसमें से निकलना बहुत कठिन है ।इसीलिए इस संसार रूप नदी को वक्र कहा गया है ।जगत के जीवो में जो कुछ भी चेष्टा ,हलचल होती है ,वह प्राणों के द्वारा ही होती है । इसीलिए प्राणों को इस भव सरिता की तरंग माला कहा गया है ।नदी में हलचल तरंगों से ही होती है ।पांचों ज्ञान इंद्रियों के द्वारा होने वाले चाक्षुष आदि पांच प्रकार के ज्ञानों का आदि कारण मन है ।जितने भी ज्ञान है ,सब मन की ही तो वृत्तियां हैं। मन ना हो तो इंद्रियों के सचेत रहने पर भी किसी प्रकार का ज्ञान नहीं हो सकता। यह मन ही संसार रूप नदी का मूल है। मनसे ही संसार की सृष्टि होती है। सारा जगत मन की ही कल्पना है। मन के अमन हो जाने पर इस जगत का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। जब तक मन जीवित है ,तब तक संसार चक्र है ।इंद्रियों के शब्द , स्पर्श ,रूप, रस ,गंध आदि पांच विषय ही इस संसार रूप नदी में आवर्त अर्थात भंवर है । इन्हीं में फंसकर जीव जन्म मृत्यु के चक्कर में पड़ा रहता है ।गर्भ का दुख, जन्म का दुख , बुढ़ापे का दुख ,रोग का दुख और मृत्यु का दुख --ये पांच प्रकार के दुख ही इस नदी के प्रवाह में वेग रुप हैं । इन्हीं के थपेड़ों से जीव व्याकुल रहता है और इस योनि से उस योनि में निरंतर भटकता रहता है । अविद्या अर्थात अज्ञान ,अस्मिता अर्थात अहंकार, राग अर्थात प्रिय बुद्द्धि , द्वेष अर्थात अप्रिय बुद्धि और अभिनिवेश अर्थात मृत्यु का भय -- ये पंच विध क्लेश ही इस संसार रूप नदी के पांच पर्व अर्थात विभाग हैं। इन्हीं 5 विभागों में यह जगत बँँटा हुआ है ।इन पांचों का समुदाय ही संसार का स्वरूप है और अंतःकरण की 50 वृत्तियां ही इस नदी के 50 भेद अर्थात भिन्न भिन्न रूप हैं।अंतरण की वृत्तियों को लेकर ही संसार में भेद की प्रतीति होती है। -- क्रमशः
⚜️🚩सत्यमेव जयते 🚩⚜️
⚜️🚩 जय श्री राम 🚩⚜️
🚩जय गुरु देव 🚩
⚜️🚩जय मां आदिशक्ति🚩⚜️
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