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Saturday, May 16, 2020

विचारों से मुक्ति कैसे हो?

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👉विचारों से मुक्ति कैसे हो ❓
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❓प्रणाम महात्मन, आपका वीडियो देखा, आपने मन को नियंत्रित करने की विधि वैज्ञानिक रूप से समझाई है कि कैसे शरीर से प्रारंभ करके मन तक पहुंचा जाए और उसे नियंत्रित किया जाए।
हालांकि ध्यान में मन तो लग जाता है, मैंने पाया है कि आज्ञा चक्र पर ध्यान करने से यह सहज ही आपका ध्यान अपनी ओर खींचता है और आपको प्रयास कीआवश्यकता नहीं होती।

आप इस पथ के अनुभवी हैं अतः पुनः कुछ प्रश्न हैं।

नेत्र बंद करने पर जो प्रकाश दिखता है वह सदैव ही क्यूँ दिखता रहता है, पहले मुझे लगा था कि केवल ध्यान करते समय ही यह दिखता होगा पर जब भी आंखें बंद करो यह हमेशा वहां होता है।

ध्यान में मंद प्रकाश के वृत्ताकार वलय  दिखतें हैं जो घूमते रहते हैं एवं जिनका रंग हल्का पीला होता है, ये कभी छोटे हो कर विलुप्त होते रहते हैं कभी एक पुंज के रूप में घूमते हैं, कभी कभी इन वलयों के मध्य गहरा नीला रंग दृष्टिगोचर होता है।

चेतना के आयाम अद्भुत हैं पर मन का ठहर जाना ही अभीष्ठ है, अधिकांश समय मैनें देखा है कि भविष्य या अतीत के विचार चलते रहते हैं इस कारण हम वर्तमान में नहीं ठहर पाते, बस यह हर समय इसी क्षण में ठहर जाना संभव हो तब अभीष्ठ सिद्ध हो।
               नमन
                           - अनिरुद्ध त्रिवेदी 

🕉🌞अनिरुद्ध त्रिवेदी जी जय मां आदिशक्ति! प्रथमतया तो आप इस अनुभव तक पहुंच पाए हैं ,इसके लिए बहुत-बहुत  बधाई  एवं आगे के पथ के लिए शुभकामनाएं । आपने जिस धैर्य एवं साहस के साथ साधना पथ पर दृढ़ता से कदम आगे बढ़ाए हैं,  निश्चित ही प्रशंसा के योग्य है । यह उस मां आदिशक्ति की कृपा का ही प्रसाद है ।
         आपने लिखा है मन में विचार आ रहे हैं और जा रहे हैं ध्यान एक केंद्र पर स्थित है किंतु  विचारों की गति रुक नहीं रही है तो आप स्पष्ट रूप से समझ लीजिए विचार आ रहे हैं और जा रहे हैं यह इतना महत्वपूर्ण नहीं जितना महत्वपूर्ण ध्यान का एक केंद्र बिंदु पर स्थिर हो जाना है ,प्रकाश का साक्षात्कार आज्ञा चक्र पर होने लगना है। विचार आ रहे हैं जा रहे हैं यह कोई महत्वपूर्ण नहीं है इन्हें आने दीजिए और जाने दीजिए। बस दृष्टा बंन कर इन्हें देखते रहिए, एक केंद्र बिंदु पर टिके रहकर ।बस निरंतर जो आपको प्रकाश दिखाई दे रहा है, यही सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। यही प्रकाश है जो आप की संपूर्ण चेतना को ब्रह्मांड व्यापी बनाकर परब्रह्म परमात्मा के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान करवाएगा। यदि आप मन को पूर्णतया क्रिया शून्य बनाना चाहते हैं अर्थात निर्विकल्प निर्विचार समाधि में जाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको ध्यान की समय अवधि  3 घंटे 40 मिनट से ऊपर ले जानी होगी। ध्यान की इस समय अवधि के बाद किसी भी व्यक्ति का मन बिल्कुल क्रिया शून्य अवस्था को प्राप्त करने लगता है किंतु इस स्थिति में आपके सामने बहुत सारी समस्याएं उत्पन्न हो जाएंगी ।आप संसार से पूर्णतया विरक्त हो जाएंगे और आपको सारे रिश्ते नाते बिल्कुल बोझ लगने लगेंगे। आपके अंदर काम भाव बिल्कुल भी जीवित नहीं रहेगा। आपकी संपूर्ण ऊर्जा का रूपांतरण होकर ऊर्जा सहस्रार चक्र में प्रवाहित होने लगेगी। इसलिए एक सामान्य गृहस्थ व्यक्ति को मेरे हिसाब से दो से ढाई घंटे से अधिक ध्यान नहीं करना चाहिए। इस समय अवधि तक किया गया ध्यान व्यक्ति को समाज से जोड़कर भी रखता है  उसे पारिवारिक दायित्व निर्वहन करने योग्य भी बनाए रखता है और धीरे-धीरे वह उस पूर्ण ब्रह्म परमात्मा के वास्तविक अस्तित्व का ज्ञान प्राप्त करने के नजदीक भी पहुंचता रहता है। बाकी यदि आप 3 घंटे तक भी एक आसन में स्थिर होकर ध्यान करते हैं तो आप पूर्ण विरक्त अवस्था की ओर आगे बढ़ जाएंगे और बाद में ऐसी स्थिति आएगी कि आप का मन ध्यान से उठने का भी नहीं होगा। आप दिनभर आंखें बंद करके ध्यान में डूबे रहने को ही सबसे बड़ा आनंद समझने लगेंगे। यह संसार एवं इसके दायित्व आपको पूर्णतया बोझ लगने लगेंगे। इस स्थिति में आप घर परिवार की देखभाल कैसे कर पाएंगे? मुझे स्वयं अपने ध्यान को इस स्थिति से मुक्त होने के लिए नीचे लाना पड़ा है। बाकी एक समय ऐसा था जब मेरा मन दिन भर सिर्फ ध्यान में बैठे रहने का होने लगा था। इस संसार का कोई भी कार्य मुझे अच्छा नहीं लगता था। यहां तक कि नौकरी का दायित्व भी बोझ लगने लगा था । आपके सामने ऐसी समस्या नहीं आए, इसके लिए इतना ही पर्याप्त है कि अधिकतम 2 से ढाई घंटे तक आप ध्यान करते रहें । रिटायरमेंट के बाद निश्चित रूप से आप चाहे जितना ध्यान कर लेना और आप समाधि में जाएंगे तो भी कोई समस्या नहीं क्योंकि फिर आपको कोई रोकेगा टोकेगा  भी नहीं। 
    ⚜️🚩 सत्यमेव जयते 🚩⚜️
   ✴️ मांँ आदि शक्ति कुंडलिनी योग झालरापाटन ✴️
             🚩 जय गुरुदेव 🚩
  ⚜️🚩जय मां आदिशक्ति🚩⚜️

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