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Tuesday, April 16, 2024

क्या ब्राह्मण दोषी होने पर भी दंड देने योग्य नहीं है?

योगाचार्य जी 
                🙏नमस्कार🙏
       डी डी नेशनल चेनल पर रामानंद सागर द्वारा निर्मित धारावाहिक ''रामायण'' का पुनः प्रसारण प्रारंभ हो चुका  है।

आज इसमें शिव धनुष को श्री राम जी के द्वारा भंग होने की कथा दिखाई गई।जिसमें परशुरामजी का महाराज जनक के दरबार में आना तथा उनका श्री लक्ष्मण के साथ संवाद होना सब बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण तरीके के साथ प्रस्तुतिकरण किया गया।
पर एक बात की शंका मेरे मन में उठ रही है कि जिस तरह परशुरामजी ने जनक के दरबार में जनक , विश्वामित्र,श्रीराम और लक्ष्मण तथा वहां पर उपस्थित सभी राजा ,महात्माऔं का घोर अपमान किया और जिस तरह से अमर्यादित आचरण किया उससे नहीं लगता की वो श्री हरि के अवतार थे!
दूसरी बात एक ही समय में श्री हरि के दो अवतार कैसे हो सकते हे?
इस धारावाहिक के द्वारा पुनः बाह्मणो को श्रैष्ठ और पूजनीय बताया जा रहा है चाहे वे कितने ही अहंकारी और अमर्यादित आचरण करने वाले हो जेसे की परशुरामजी!
इस धारावाहिक में परशुरामजी के  प्रत्युत्तर में लक्ष्मण और राम जी के मुंह से यह कहलवाया गया की हम सूर्य वंशी, गौ ,नारी और ब्राह्मण पर वार नहीं करते ।
तो क्या ब्राह्मणो के अलावा बाकी के तीनों वर्ण (क्षत्रिय,वेश्य,और शुद्र)वार करने योग्य हैं? चाहे उनका दोष हो या ना हो तथा ब्राह्मण दोषी होने पर भी वार करने योग्य नहीं है?
तो क्या इनको ब्रह्मा विष्णु महेश ने विशेषाधिकार दे रखा हे?
इस तरह इस धारावाहिक के द्वारा हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा रही है। क्या यही सनातन धर्म है?क्या यही है असली हिंदू धर्म?

कृपया मेरी शंकाओं का समाधान करें।

🕉🌞👏 कैलाश जी जय माँ आदि शक्ति !आपने जो प्रश्न उठाये हैं, जिज्ञासा रखी है। यदि देखा जाए तो इन प्रश्नों का जवाब देना बहुत ही टेढ़ा कार्य है क्योंकि यह आस्था एवं विश्वास से जुड़ा हुआ विषय है किंतु फिर भी आपने प्रश्न पूछे हैं तो वास्तविक रूप में इनका जवाब देना मेरे लिए नितांत आवश्यक है। आपने परशुराम जी एवं भगवान राम के विषय में कहा कि एक ही समय पर भगवान विष्णु के 2 अवतार कैसे हो सकते हैं? जहां तक बात है अवतार की तो  संपूर्ण ब्रह्मांड में जो भी मानव प्राणी, जीव ,जंतु ,पशु पक्षी दिखाई दे रहे हैं ,सब के सब उन भगवान विष्णु के ही अवतार हैं। यहां तक की जो वस्तुएं हमें निर्जीव दिखाई देती है वेी  उस परब्रह्म परमात्मा का अवतार ही हैं। इस ब्रह्मांड के कण-कण में उस गॉड पार्टिकल का ही निवास है ।उस राम का ही निवास है। उस परमपिता परमात्मा एवं जगत जननी मां का ही निवास है ।उसको चाहे कुछ भी नाम दे दो किंतु वह संपूर्ण ब्रह्मांड में एक ही है। फर्क सिर्फ इतना होता है कि इस संसार में आए हुए व्यक्तियों के साथ अपने अपने कर्मों के आधार पर गुण निर्धारित होकर आते हैं । प्रकृति के वशीभूत होकर प्रत्येक आत्मा अपने अपने कर्मों के अनुसार सुख दुख भोगती है । जीवात्मा के कर्म ही होते हैं जो उसे ऊंचा उठाकर ब्राह्मणत्व में स्थापित कर दें। इस संसार में जन्म लेने वाला प्रत्येक मनुष्य अपने साथ असीम संभावनाओं को लेकर आता है और अपने इसी जीवन काल में वह साधना के मार्ग पर चलता हुआ अपनी सूक्ष्म चेतना को जागृत करके जन सामान्य से बहुत ही ऊंचा आयाम छू सकता है। जिन महान विभूतियों को हम भगवान कहकर संबोधित करते हैं, अवतार कहकर संबोधित करते हैं तो भूतकाल कि वे महान तपस्वी विभूतियां रही होंगी ।जो महान तपस्वी थे। यह ब्रह्मांड पूर्णतया विज्ञान युक्त नियम पर आधारित है और 
यह
ज्ञान युक्त नियम से ही चलता है।
👏 इसलिए मेरे दृष्टिकोण के अनुसार मैं नहीं मानता कि यहां पर सिर्फ 10 -12 या 24 अवतार हुए हैं । यहां पर जन्म लेने वाला हर व्यक्ति ,हर प्राणी उस परमपिता परमात्मा का ही अवतार है , उसी का अंश है। बस जो भेद हमें दिखाई देता है वह चेतना के विकास का भेद है । किस जीवात्मा ने अपनी चेतना को कितना विकसित किया है?यह उसका भेद है। जिन महान विभूतियों को हम अवतार कह कर पुकारते हैं वे चेतना के सर्वोच्च शिखर को प्राप्त महान व्यक्तित्व रहे हैं। जिन्होंने समाज में बहुत कुछ विशेष एवं नया दिया है।
             मेरे दृष्टिकोण के अनुसार संसार का वह हर महान व्यक्तित्व जिसने इस दुनिया को कुछ विशेष दिया है वह विराट चेतना का अवतार ही था किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि वह पत्थर जो हमें कुछ करता हुआ दिखाई नहीं देता वह परमात्मा का अवतार नहीं है? वह भी अवतार है, वह भी निरंतर अपनी चेतना का विकास कर रहा है और चेतना का विकास करते करते हो सकता है किसी दिन वह किसी मंदिर की मूर्ति बन जाए!! जो इंसान कल तक उसको कोई महत्व नहीं देते थे आज उसके सामने जाकर अपना सिर झुकाएंगे। नतमस्तक होंगे। इसलिए यहां पर सब अवतार ही हैं। यदि मैं अपने दृष्टिकोण से देखूं तो आप भी अवतार हैं । कोई भी अवतार से कम नहीं है ।बस सिर्फ चेतना के विकास स्तर का अंतर है।
👏 इस ग्रुप परिवार में मुझे बचपन से जानने वाले कई मित्र हैं। क्या कभी मेरे साथ रहते हुए उन्हें ऐसा लगा होगा कि मैं इस राह पर इतना आगे जा सकता हूंँ? आज बहुत से लोग मुझे विभिन्न प्रकार के संबोधनों से संबोधित करते हैं और मैं उनके उन शब्दों को महसूस करता हूंँ कि उनके शब्दों में  कितना भाव ?कितना सम्मान ?कितनी आत्मीयता भरी होती है ,आत्मा की गहराई तक! आप किसी और का मूल्यांकन मत कीजिए जो मुझे बचपन से जानते हैं सिर्फ मेरा ही मूल्यांकन कर लीजिए। मैं कल भी सामान्य इंसान था और आज भी सामान्य इंसान ही हूंँ और आने वाले समय में भी सामान्य इंसान ही रहूंगा किंतु इस संसार में कोई भी व्यक्ति थोड़ा बहुत भी कुछ विशेष कार्य यदि कर देता है तो उसके महिमामंडन करने का यहां पर बहुत बड़ा प्रचलन है। मेरे दुश्मनों की कोई कमी नहीं है किंतु हो सकता है आगे जाकर यह समाज मेरे बारे में भी न जाने कौन-कौन सी बातें करने लगें? हो सकता है कोई महान ऋषि मुनि तपस्वी योगी बताएं!! हो सकता है मेरे शब्द पीछे धकेल दिए जाएं  और मुझे भी बहुत बड़ा महिमामंडित कर दिया जाए! कुछ मुझे गुंडा ,बदमाश , लड़ाकू, क्रोधी, अहंकारी भी कहेंगे और कुछ महिमामंडित भी करेंगे। यह आने वाले समय की भविष्यवाणी समझ लीजिए किंतु एक बात स्पष्ट रूप से समझ लीजिए ।मैं एक सामान्य इंसान ही हूंँ कोई अवतार नहीं ! मैंने जो कुछ भी हासिल किया है और कर रहा हूंँ वह यहीं से हासिल किया है और यहीं से हासिल कर रहा हूंँ और अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है। और दूसरी बात हर वह व्यक्ति जो  अपने आप को उत्कृष्ट बनाना चाहता है । वह स्वयं इस सत्य से रूबरू हो सकता है निश्चित रूप से हो सकता है।
⚜ जहां तक बात है परशुराम जी के संबंध में तो मेरे दृष्टिकोण में मैं उन्हें ब्राह्मण नहीं क्षत्रिय मानता हूंँ और उपनिषदों के मूल्यांकन के आधार पर वे सिर्फ और सिर्फ क्षत्रिय कहलाने योग्य हैं। ब्राह्मण कहलाने योग्य नहीं। ब्राह्मण कहलाने का हकदार वेदों ने सिर्फ और सिर्फ उस व्यक्ति को ही निर्धारित किया है जो काम, क्रोध ,लोभ ,मोह, दंभ , दुर्भाव, द्वेष, अहंकार आदि से पूर्णतया रिक्त हो गया हो। जिनको ब्राह्मणत्व को वास्तविक सत्य दृष्टिकोण में समझना हो वे वज्रसूचीकोपनिषद का स्वाध्याय करें। इसलिए महायोगी भगवान परशुराम जी मुझे किसी भी दृष्टिकोण से ब्राह्मण दिखाई नहीं देते।
   ⚜🚩 सत्यमेव जयते 🚩⚜

         जय गुरुदेव

      जय मां आदिशक्ति

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