Wikipedia

Search results

Friday, November 1, 2019

क्या गायत्री मंत्र एवं ओंकार के जप से हानि होती है?

🕉🌞🌞🌞🚩🌞🌞🌞🕉
               ⚜🚩⚜
❓ मैंने कहीं पढ़ा है कि गायत्री मंत्र एवं ओमकार का जप करने से हानि होती है!कृपया मार्गदर्शन करें ,सत्य क्या है?
                 - सीमा चौहान जी
              ⚜🔥⚜

🌞👉सीमा चौहान जी ॐ 👉ये सब लिखने वाले पूर्णतया  सनातन धर्म के दुश्मन हैं ,पाखंडी हैं ,जिन्होंने जनसामान्य को सत्य से भटकाने के लिए ये सब लिख रखा है। गायत्री महामंत्र एवं ओंकार का जप करने से किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं होता बल्कि जप करने वाले की चेतना का विराट विस्तार होता है।यदि नुकसान होता है तो पाखंड वाद को, भटकाव वाद को क्योंकि ओंकार एवं गायत्री महामंत्र का जप करने वाले की चेतना अत्यंत विकसित हो जाती है ऐसी स्थिति में फिर वह कभी भी पाखंडवाद के चंगुल में नहीं फंसता बल्कि पाखंड और सत्य के अंदर भेद उसे स्पष्ट रूप से समझ आने लगता है और इसी के परिणाम स्वरूप वह पाखंडवाद को जड़ से उखाड़ने का प्रयास करने लगता है। ऐसे साधक की आत्म चेतना में सत्य का प्रकाश प्रकाशित हो उठता है। उसे खुदगर्जी नहीं ,परोपकारमयी कार्यों में आनंद आने लगता है ,इसलिए वह मानव मात्र ही नहीं ,प्राणी मात्र के हित में कार्य करने लगता है। इसलिए कि जन सामान्य की चेतना विकसित नहीं हो और वे जिंदगी भर उलझे रहें जिससे कि सत्य के नजदीक नहीं पहुंचकर वे तरह-तरह के ढोंग पाखंड में भटकता  रहे ,इसी के लिए गायत्री महामंत्र एवं ओंकार से दूर रखने का प्रयास किया गया है और जब से यह परंपरा शुरू हुई है तब से सनातन धर्म निरंतर पतन के गर्त में गिरता जा रहा है । साधक चाहे किसी भी वैदिक मंत्र का जप करें ,उसे अपने खान-पान को तो ठीक करना ही होगा। हांँ वाममार्गीय तंत्र पद्धति में यह आवश्यक शर्त नहीं है इसलिए नवार्ण मंत्र आदि का जप मांसाहारी व्यक्ति भी कर सकते हैं किंतु गायत्री महामंत्र एवं ओंकार के साथ यह सब नहीं चल सकता। यह निश्चित है गायत्री महामंत्र की साधना वाममार्गी पद्धति से भी की जाती है किंतु उसका सारा विधि विधान पूर्णतया अलग है और बहुत खतरनाक भी इसलिए जिस किसी स्त्री पुरुष को   आत्म कल्याण एवं मुक्ति का मार्ग ही प्रिय है । उसे चाहिए  स्नान आदि करके गायत्री महामंत्र एवं ओमकार का नाद मय  जप  करें  किंतु मौन मानसिक रूप से जप कभी भी, कहीं भी, किसी भी स्थिति में किया जा सकता है ।बस यही एकमात्र शर्त है ,बाकी कोई शर्त नहीं है। आप स्वयं करके देखिए आपको स्वयं पता लग जाएगा कि गायत्री महामंत्र एवं ओंकार का जप हानि करता है या नहीं! हां यह अवश्य है -यदि आप जप करेंगी तो आपके पतिदेव को भी शाकाहारी होना पड़ेगा क्योंकि  पति पत्नी की ऊर्जा आपस में  स्थानांतरित होती है । पति एवं पत्नी को आपस में अपनी पवित्रता एवं अपवित्रता स्थानांतरित होती रहती है। यदि पति साधना करता है और पत्नी साधना नहीं करती फिर भी निश्चित मान के चलिए  तपस्वी पति की पत्नी  पर इस ऊर्जा का अत्यधिक प्रभाव हो   जाएगा। इसलिए दोनों का पवित्र  खानपान होना  नितांत आवश्यक है और इसीलिए इस पथ पर  एक पत्नी पति व्रत धर्म  आवश्यक हो जाता है ।इन ब्रह्म बीज  एवं ब्रह्म मंत्र  को जप करने के लिए शाकाहार सबसे प्रथम आवश्यकता है। बाकी सब कुछ अपने आप व्यवस्थित हो जाता है। इन समस्त प्रकार के शराब एवं मांसाहार से  से दूर होकर साधक जैसे ही साधना करता है ।यदि उसके अंदर गुटखा जर्दा आदि खाने की आदतें हैं तो धीरे-धीरे अपने आप छूट जाती है। धीरे धीरे सभी दुर्व्यसनों से साधक निश्चित रूप से मुक्त हो जाता है और वह पूर्ण पवित्र आचरण की ओर बढ़ने लगता है। बस हानि कारक प्रभाव तभी होता है जब परिवार में मांसाहार शराब का माहौल हो और पति पत्नी में से कोई एक व्यक्ति भी यदि मांसाहार करता है तो जो मांसाहार करेगा, उस पर यह ऊर्जा निश्चित रूप से प्रभाव डालती है। बिना चमत्कार दिखाये कोई नमस्कार नहीं करता इसलिए मां आदिशक्ति अपना डंडा चलाना शुरु कर देती है कि बेटा इस मार्ग से हट जा, यह मुक्ति का मार्ग नहीं है। यह अंधकार का मार्ग है ,अज्ञानता का मार्ग है ,पतन का मार्ग है। और जो आसानी से इस मार्ग को नहीं छोड़ता उसकी जमकर पिटाई निश्चित है। प्रारंभ में छोटे-छोटे झटके दिए जाते हैं ताकि व्यक्ति समझ जाए और इस मार्ग को छोड़ दें किंतु बाद में ऐसे झटके दिए जाते हैं कि या तो व्यक्ति सुधर जाता है या फिर बर्बाद हो जाता है । इस स्थिति में व्यक्ति के सामने दो ही मार्ग  होते  हैं या तो साधना छोड़ दो या गलत खानपान छोड़ दो ।नहीं छोड़ोगे तो बर्बाद हो जाओगे और यदि तुमने अपने खानपान को ठीक कर लिया तो फिर आबाद हो जाओगे। फिर यह गायत्री महामंत्र एवं ओमकार तुम्हारे लिए कल्पवृक्ष है ,कामधेनु है। सब कुछ मिलेगा ,सब कुछ जो तुम चाहोगे बस जो हम चाह रहे हैं वह कल्याणकारी होना चाहिए, हितकारी होना चाहिए ।बाकी सब कुछ मां आदिशक्ति अपने पुत्र पुत्रियों को अपने आप देती रहती है। बस यही एकमात्र शर्त है ,इसके अलावा कोई शर्त नहीं !जो शाकाहारी हैं उसके लिए गायत्री महामंत्र एवं ओंकार से बढ़कर कोई सिद्ध मंत्र नहीं व परब्रह्म परमात्मा के साक्षात्कार का मार्ग नहीं। हां एक विशेष बात गायत्री के साधक का दृष्टिकोण विस्तृत होना चाहिए। वह खुदगर्ज नहीं बल्कि परोपकार मयी व्यक्तित्व को धारण करने वाला होना चाहिए ।यही इस मंत्र की साधना का सबसे मूल रहस्य एवं सिद्धांत है। तभी इस खजाने की चाबी साधक के हाथ लग पाती है वरना कभी नहीं।

                   - रामेश्वर हिंदू
      ⚜🚩सत्यमेव जयते🚩⚜
🌞👉 अखिल विश्व गायत्री परिवार अकलेरा
     ⚜🚩 जय मां आदिशक्ति 🚩⚜

No comments:

Post a Comment

मंदिर की पुकार

🕉️🚩🚩 मंदिर की पुकार🚩🚩🕉️ 🕉️ रुको ! रुको ! अरे! कुछ देर रुको!  कहां देखते हो ? मैं कोई और नहीं!   मैं वही हूं ,जिसके दरवाजे पर तुम खड़े...