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❓ कुछ दिन साधना उपासना करने के बाद सामाजिक दायित्व एवं स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की वजह से साधना उपासना डिस्टर्ब हो जाती है, क्या करें?
- सुभाष पांडे
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🌞 सुभाष जी जय माँ आदि शक्ति !
👉साधना उपासना करने के लिए हमारे अंदर जुनून होना चाहिए, जबकि हम साधना एवं उपासना को सिर्फ औपचारिकता समझते हैं । अन्य सांसारिक कार्य हमारे जीवन की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में सम्मिलित होते हैं, किंतु साधना -उपासना हमारे जीवन की प्राथमिकताओं में कोई महत्वपूर्ण स्थान नहीं रखती । वास्तविक अर्थ में देखा जाए तो हम साधना -उपासना का महत्व जानते ही नहीं है ! इसीलिए उपासना के लिए निकाले गए समय को महत्वहीन समझते हैं ,जबकि उपासना करना प्रत्येक मनुष्य के जीवन का सबसे प्रमुख कर्तव्य है। हम नाशवान सांसारिक कार्यों को हमारे अमूल्य मानव तन का अधिकांश समय दे देते हैं, किंतु जिस मुख्य लक्ष्य को साधने के लिए यह दुर्लभ मानव तन प्राप्त हुआ है ; उस लक्ष्य को भूला कर यदि हम संसार के अन्य लक्ष्यों में ही अपना संपूर्ण जीवन गवां देते हैं तो इससे बड़ी मूर्खतापूर्ण स्थिति अन्य क्या हो सकती है ? संसार में रहकर संसार के समस्त कर्तव्य कर्मों का पालन तो करना ही है , किंतु हमें यह भी हमेशा याद होना चाहिए कि जिस प्रकार से भोजन करना आवश्यक है , दैनिक कर्म करना आवश्यक है ।
इनके लिए हम चाहे कितना ही आवश्यक कार्य हो समय निकालते हैं । उसी प्रकार से साधना -उपासना हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा होनी चाहिए । सुबह शाम दोनों समय चाहे कुछ भी हो जाए,यथासंभव मुझे उपासना(परम चेतना के नजदीक बैठना )करनी ही है। और यदि कोई भी व्यक्ति उपासना करना चाहता है तो उसे सुबह 4:00 बजे के लगभग उठने का अभ्यास करना चाहिए और यकीन मान कर चलिए। यदि कोई व्यक्ति मां आदिशक्ति से सच्चे हृदय से प्रार्थना करता है और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ता है, तो वह निश्चित रूप से 4:00 बजे उठने में समर्थ हो जाएगा । फिर उसके पास समय का कोई अभाव नहीं रहेगा क्योंकि अधिकांश सांसारिक व्यक्ति 6:00 से 7:00 के बीच उठते हैं । जैसे ही व्यक्ति साधना के मार्ग पर आगे बढ़ता है तो सामान्य व्यक्ति को न्यूनतम 6 से 7 घंटे की नींद की आवश्यकता होती है ,जबकि एक योगी की नींद अपने आप कम होती चली जाती है । वह 3 से 4 घंटे की नींद में भी अन्य इंसानों से बहुत अधिक क्रियाशील एवं आनंददायी स्थिति में रह कर जन सामान्य से अधिक क्रियाशील रह सकता है। जनसामान्य 6-7 घंटे ही नींद नहीं लेते बल्कि 8 -9 घंटे तक बिस्तर पर पड़े रहते हैं। नींद नहीं भी आती तो भी जबरदस्ती बिस्तर पर पड़े रहते हैं और आजकल तो लेट सोने एवं लेट उठने का जैसे फैशन हो गया है ।अधिकांश व्यक्ति सूर्योदय होने के बाद बिस्तर छोड़ते हैं।यह वेदों के अनुसार महापाप है , ब्रह्म अपराध है। उस सत्य स्वरूप परब्रह्म परमात्मा के नियम के विरुद्ध है ,जिसने संपूर्ण सृष्टि को नियम बध करके रखा है। संध्याकाल उस परमपिता परमात्मा की उपासना करने के लिए होता है, सोने के लिए नहीं ! अरे!जो ये कहते हैं कि ईश्वर है भी या नहीं !! उन्हें मैं चुनौती देकर कह रहा हूंँ - वैदिक विधि विधान से सिर्फ 3 महीने साधना करके देखो आप को पता लग जाएगा कि वास्तविकता क्या है ? सुबह सूर्योदय के पश्चात उठने से शारीरिक ,मानसिक एवं आध्यात्मिक पतन होता है। सूर्योदय के बाद उठने वाला हर व्यक्ति नित्य ब्रह्म अपराध का भागी बनता है। हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी महायोगी है । इसी वजह से वे 3 घंटे नींद लेकर भी दिनभर आनंद के साथ मां भारती के लिए दौड़ते भागते रहते हैं ।वे सामान्य इंसान नहीं महायोगी है, इसीलिए ऐसा कर पा रहे हैं । आम इंसान नहीं कर सकता !! इसलिए योगी बनिए ,भोगी नहीं ! आपके पास अभी जितना समय है उससे कई गुना समय आपके पास बढ़ जाएगा , सांसारिक दायित्वों का निर्वहन करने के लिए भी। आप संसार के लिए अभी जितना समय देते हैं ।उससे भी अधिक संसार को समय दे सकेंगे और साधना उपासना भी सहजता से कर सकेंगे।
-- सनातनी हिंदू योगाचार्य रामेश्वर मानव (मेरी संपूर्ण पहचान)
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