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Saturday, July 13, 2019

गायत्री और सावित्री!!!

🕉🌞 गायत्री और सावित्री🌞🕉
                  ⚜🚩⚜
🌞👉 विज्ञान ने अनेक प्रयोजनों के लिए अनेकानेक यंत्र उपकरण बनाए और आविष्कार किए गए । उन सभी की मूल सत्ता काया में सन्निहित अनेकों सूक्ष्म केंद्रों में समाहित होती है । वह चाहे तो प्रयत्न पूर्वक उन्हें सक्रिय सक्षम कर सकता है और काया को ऐसी प्रयोगशाला में परिणित कर सकता है जिसमें वैज्ञानिकों द्वारा विनिर्मित सभी यंत्र उपकरणों की सत्ता उबर सके और वे ही  कार्य कर सके जो विज्ञान क्षेत्र के मूर्धन्य अपने शोध प्रयासों से संपन्न करते हैं।
⚜👏 मां आदिशक्ति की दो प्रकार की प्रतिमाएंँ पाई जाती है। इनमें एक मुख, दो भुजा ,हाथ में कमंडल ,माला, वाहन हंस- यह ब्राह्मी शक्ति है ।इसे गायत्री कहते हैं ।एक दूसरे प्रकार की छवि पंचमुखी प्रतिमा या चित्र  रूप में मिलती है -इसे सावित्री कहते हैं ।
🌞👉 गायत्री का वाहन हंस है । हंस अर्थात राजहंस ,परमहंस, नीर क्षीर विवेक कर सकने वाला, मोती जुगने कीड़े आदि न खाने वाला ,व्रतशील ,माला से उपासना, साधना और पुस्तक से स्वाध्याय का ,सत्संग का ,मनन, चिंतन का भाव दृष्टिगत होता है ।
🌞👉 सावित्री का वाहन कमल है ।कमल अर्थात प्रसन्नता ।सुख साधनों की बहुलता ।उसके पांच मुख अर्थात शरीर पांच तत्वों का बना है और उसका मानस चेतन   5 तत्वो के  समन्वय से बना है । सावित्री की 10 भुजाएं अर्थात काया में सन्निहित  पांच कर्मेंद्रियाँ और पांच ज्ञानेंद्रियां ।इंद्रिय शक्ति से ही काया अपने विभिन्न कार्य संपन्न करती है ।आयुध में भी ऐसे यंत्र उपकरणों का चित्रण है जो लौकिक प्रगति एवं संघर्षशीलता के लिए काम आते हैं।
🌞👏 गायत्री प्रधान है क्योंकि सद ज्ञान हस्त गत होने से मनुष्य ऐसा व्यक्तित्व उपलब्ध करता है जो यदि संपदा क्षेत्र की ओर ध्यान दें तो अपने या दूसरों के लिए विपुल वैभव उपलब्ध कर सकता है । किंतु सावित्री का क्षेत्र विज्ञान की सीमा एवं सांसारिक उपलब्धियों तक सीमित है। आवश्यक नहीं कि वैभव संपन्न  व्यक्ति सद् ज्ञान का भी धनी हो। इसलिए उसे गौण माना गया है । व्यक्ति में आत्मा प्रमुख है और शरीर गौण। इसी प्रकार आध्यात्मिक दृष्टिकोण से गायत्री को प्रमुख  और  सावित्री को गौण  माना जाता  रहा है। फिर भी उपास्य  दोनों हैं ।दोनों ही की अपने अपने स्थान पर आवश्यकता रहती है ।इसलिए समन्वय वादी साधक दोनों का ही प्रयोग करते और यथा समय उनकी क्षमताओं को कार्यान्वित करते हैं।
🌞👉 वाल्मीकि रामायण में प्रसंग आता है कि विश्वामित्र राम लक्ष्मण को यज्ञ रक्षा के बहाने अपने आश्रम में ले गए थे ।वहां उन्हें बला -अति बला विद्याएँ सिखाई। यह दोनों सावित्री और गायत्री के ही दूसरे नाम हैं। एक के माध्यम से उन्होंने लंका में दुर्धर्ष असुरों को परास्त किया। दूसरी की शक्ति से उन्होंने त्रेता युग में सत युग को वापस बुलाया । राम राज्य ,धर्म राज्य की स्थापना की। इस प्रकार दोनों ही विद्या दो भिन्न  प्रकार के प्रयोजनों में काम आई और असाधारण प्रयोजनों की पूर्ति में सफल रही ।
🌞👏 उपर्युक्त पंक्तियों में कहा जा चुका है कि ब्रह्मा जी के दो पत्नियां थी ।प्रथम गायत्री दूसरी सावित्री ।इसे अलंकारिक प्रतिपादन में ज्ञान चेतना और पदार्थ संपदा कहा जा सकता है । इनमें एक परा  प्रकृति है, दूसरी  अपरा ।प्रकृति के अंतर्गत मन, बुद्धि ,चित्त ,अहंकार, ऋतंभरा प्रज्ञा आदि का ज्ञान आता है।
👉 दूसरी पत्नी सावित्री  इसे अपरा प्रकृति ,पदार्थ चेतना ,जड़ प्रकृति कहा जाता है ।पदार्थों की समस्त हल चलें ,गतिविधियां -उसी पर निर्भर है ।परमाणुओं की भ्रमण शीलता ,रसायनों की प्रभावशीलता ,विद्युत ,ताप,  प्रकाश, चुंबकत्व, ईथर आदि उसी के भाग हैं ।पदार्थ विज्ञान इन साधनों को काम में लाकर  अगणित अविष्कार करने और सुविधा साधन उत्पन्न करने में लगा हुआ है ।इसी प्रकृति को सावित्री कहते हैं ।कुंडलिनी इसी दूसरी शक्ति का नाम है।
              -- पूज्य सदगुरुदेव श्री राम शर्मा आचार्य
👉 सावित्री कुंडलिनी एवं तंत्र पुस्तक से
🌞👉 अखिल विश्व गायत्री परिवार अकलेरा
   ⚜🚩जय मां आदिशक्ति 🚩⚜

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