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: आपका जीवन क्या है?
👉खा लिया, पी लिया, सो लिया
सांस आयी,सांस गयी;
और फिर एक दिन मिट्टी में मिल गए
अगर यही जिंदगी है,
तो फिर मानुष जीवन देवताओं को दुर्लभ कैसे ?
मानव जीवन नर से नारायण बनने की राह कैसे?
मानव जीवन शक्तियों का भंडार कैसे?
मानव जीवन मुक्ति का आधार कैसे?
यदि मनुष्य जीवन पाकर भी ये प्रश्न अनुत्तरित रहे तो मानव होने का अहंकार कैसे?
👉जिंदगी तो वहाँ है-
जहां शाश्वत का अनुभव हो;
जहां आत्मा के साथ परमात्मा की अनुभूति हो;
जहां प्राण के संचार में नाद का गूंजार हो,
जहां मुझ में तू और तुझ में मैं का आत्मबोध हो,
जहां मैं ही मैं और तू ही तू का अनंत घोष हो,
जहां आनंद की अहर्निश वर्षा हो!
जहां अमृत झरे!
☝जब तक आप ऐसे
जीवन से परिचित न हो जायें,
तब तक मत समझना कि आप मानव होकर मानव होने के लक्ष्य को साध पाए हैं।
⚜🚩 सत्यमेव जयते
जय गुरुदेव
जय मां आदिशक्ति
🙏👏👏🙏
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