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Monday, June 24, 2019

विज्ञान भैरव तंत्र 2

🕉🌞विज्ञान भैरव तंत्र 🌞🕉

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👉विज्ञान भैरव क्या है ?👈 

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🌞👉 विज्ञान भैरव तंत्र के विषय में सर्वप्रथम प्रश्न उठता है कि यह विज्ञान भैरव क्या है? इस ग्रंथ का यह नाम क्यों रखा गया? क्षेमराज के विज्ञानोद्योग के मंगल श्लोक में इसका उत्तर मिलता है, वहां विज्ञान भैरव का स्वरूप समझाया गया है, साथ ही अभिनवगुप्त ने तंत्रालोक में  समझाया है कि विज्ञान भैरव क्या है? "भयं सर्व रवयति "इस श्लोक और उसकी व्याख्या में भी  भैरव पद का विश्लेषण किया गया है। इन सब का अभिप्राय यह है कि भैरव इस विश्व का सृजन ,भरण पोषण एवं  संहार करने वाला है। ऐसा करके वह स्वयं भी पुष्ट होता है एवं प्रसन्न होता है। यह संसारी जीवों को अभय दान करने वाला है। संसारी जीव की छटपटाहट का कारण भी यही है और त्राहि-त्राहि पुकारने वाले भक्त जनों के हृदय में प्रकट होकर उनका उद्धार भी यही करता है, अर्थात निग्रह और अनुग्रह यह दोनों भगवान भैरव के ही व्यापार हैं, कार्य हैं, इसलिए यह पंचकृत्यकारी कहलाता है ।यह काल का भी काल है, इसीलिए इसको "काल भैरव" कहते हैं। यह तत्त्व योगियों के चित्त में समाधि दशा में प्रकट होता है और अज्ञानी जीवों के हृदय में बाह्य एवं आंतरिक इंद्रियों की शक्ति के रूप में दृष्टिगोचर होता है। परमात्मा का यह स्वरूप महाभयानक है और परम सौम्य भी।
      🌞👉 यह भैरव स्वरूप विज्ञान स्वरूप है अर्थात चिदात्मक है, बोधात्मक है, जानने योग्य है। सभी स्थानों में बाह्य एवं आंतरिक सभी पदार्थों में सत्य स्वरूप परमात्मा की विज्ञानात्मक  उपस्थिति का ज्ञानी योगियों को ही नहीं सामान्य जन को भी भान होता है  अतः संपूर्ण ब्रह्मांड में विज्ञानात्मक भैरव के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है , क्योंकि विशुद्ध विज्ञान के अतिरिक्त अन्य किसी पदार्थ की वास्तविक सत्ता नहीं । इस संपूर्ण ब्रह्मांड में कुछ भी काल्पनिक एवं चमत्कार युक्त नहीं ,जो कुछ है पूर्ण विज्ञान युक्त है , जानने योग्य है, बोधात्मक है। यदि प्राचीन काल का नाम लेकर  कुछ भी अविज्ञान युक्त कल्पना प्रस्तुत की जाती है जिसका व्यक्तिगत जीवन में किसी भी प्रकार से अनुभव नहीं किया जा सकता तो निश्चित रूप से वह पाखंड है। यदि ब्रह्मांड में वास्तविक सत्ता किसी की है तो पूर्णतया विशुद्ध  चेतन तत्व की है, विशुद्ध विज्ञान तत्व की है। वह विज्ञान युक्त बोधात्मक तत्व शक्ति एवं शिव का ही स्वरूप  है। यही शक्ति एवं शिव का संयुक्त स्वरूप, वास्तविक स्वरूप "विज्ञान भैरव" है।
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               ⚜️🚩सत्यमेव जयते 🚩⚜️
        ✴️  मां आदिशक्ति कुंडलिनी योग
                     🚩 जय गुरुदेव 🚩
             ⚜️🚩जय मां आदिशक्ति 🚩⚜️

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